- दीपेंद्र हुड्डा को चाय पिलाने से टारगेट पर आए
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : हिसार के भाजपा के सिटी मंडल प्रमुख एवं पूर्व पार्षद महेंद्र जुनेजा को फर्जी डिग्री मामले में पंचकूला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में अंबाला जेल भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला 12 मई 2023 को पंचकूला सेक्टर-5 थाने में दर्ज FIR नंबर 142 से जुड़ा है, जिसमें फर्जी मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कराने का खुलासा हुआ था। FIR के मुताबिक शिकायत हरियाणा काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (CIMH) के रजिस्ट्रार डॉ. दिनेश शर्मा ने दी थी।
जांच में सामने आया था कि महेंद्र कुमार जुनेजा का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट फर्जी था। रिकॉर्ड मिलान में पता चला कि जिस सर्टिफिकेट नंबर और तारीख का इस्तेमाल किया गया, वह असल में किसी अन्य डॉक्टर (डॉ. नीलम) के नाम जारी हुआ था। यानी जनेजा के नाम का सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी और बोगस पाया गया।
4 साल पहले दीपेंद्र हुड्डा घर आए तभी से शिकंजा
दरअसल, 4 साल पहले मई 2022 में भाजपा पार्षद रहे डॉ. महेंद्र जुनेजा के घर कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा पहुंचे थे और कांग्रेस का पटका उनके गले में डाला था। हालांकि विवाद बढ़ने पर डॉक्टर जुनेजा ने इस औपचारिक मुलाकात बताया था और भाजपा में ही बने रहने की बात कही थी।
मगर, इसी मुलाकात के 15 दिन डॉक्टर जुनेजा के पटेल नगर स्थित जुनेजा क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की थी। 7 घंटे तक यहां दवाओं और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई थी। इसके बाद डॉक्टर जुनेजा का पार्षद का टिकट भी काट दिया गया था।
10 लाख रुपए में डिग्री का सौदा
FIR में दर्ज बयान के अनुसार, जनेजा से संपर्क कर कुछ लोगों ने BAMS डिग्री दिलाने का झांसा दिया। 10 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। पहले 5 लाख रुपए तुरंत दिए गए। बाकी 5 लाख डिग्री मिलने पर दिए गए। जुनेजा को BAMS की फर्जी मार्कशीट, प्रोफेशनल सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सौंपे गए। यह डील पंचकूला में हुई।
इस केस में महेंद्र जुनेजा, डॉ. नीरज बंसल, डॉ. नवीन कुमार, करण सर्ना और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ IPC की धाराएं 406, 420, 467, 468, 471 और 120-B के तहत केस दर्ज किया गया था।
डॉक्टरों का नेटवर्क भी आया सामने
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि कई लोगों को फर्जी मेडिकल डिग्रियां और सर्टिफिकेट जारी किए गए। FIR में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों द्वारा MBBS तक की फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, जो समाज और मेडिकल सिस्टम के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती जांच में महेंद्र जनेजा ने खुद को पीड़ित बताते हुए बयान दिया था और सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई थी। उन्होंने पैसे वापस दिलाने की भी मांग की थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने के बाद अब उसी केस में उनकी गिरफ्तारी की गई है।
रिपोर्ट दर्ज होने से गिरफ्तारी तक ऐसे चला केस
पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद 2023 में केस दर्ज हुआ था और लंबे समय तक जांच चलती रही। अब साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए जनेजा को गिरफ्तार किया गया। 30 अगस्त और 27 अक्टूबर 2022 को सर्टिफिकेट की जांच के लिए पुलिस को शिकायत दी गई।
29 नवंबर 2022 में डिग्री फर्जी होने की पुष्टि हुई। 12 मई 2023 को पंचकूला के सेक्टर 5 थाने में FIR दर्ज की गई। 9 अप्रैल 2026 को पंचकूला पुलिस ने गिरफ्तार किया।