- पहले सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी इस तरह का बयान दे चुकीं – मैं देखती हूं कि इंद्र देव हमेशा खुश होते हैं और हमेशा पानी बरसता है
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा सरकार में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ फसल खराब हो चुकी है। किसान सरकार के स्पेशल गिरवादरी के आदेश का इंतजार कर रहे हैं मगर प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने ऐसा बयान दिया है जिसने किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है।
कृषि मंत्री ने करनाल और अंबाला दो जगह बारिश को लेकर बयान दिए। कृषि मंत्री ने कहा कि इस बारिश से फसल को कोई नुकसान नहीं होता बल्कि फायदा होता है और प्रति एक दो क्विंटल तक पैदावार बढ़ती है।
कृषि मंत्री के बयान से प्रदेश में सियासी भूचाल आना तय है क्योंकि किसान नेता व विपक्षी पार्टी के नेता लगातार सरकार से बेमौसमी बारिश के कारण हुए नुकसान की स्पेशल गिरदारवरी की मांग कर रहे हैं मगर उससे उलट कृषि मंत्री नुकसान ना होकर फायदा पहुंचने की बात कर रहे हैं। बता दें कि हरियाणा में मार्च में 16% अधिक बारिश हुई है। वहीं ओलावृष्टि से करीब 361 गांवों में फसल खराब हुई है। हालांकि सरकार ने अभी तक स्पेशल गिरदावरी के आदेश नहीं दिए हैं।
करनाल में कहा-बारिश से फसल को नुकसान नहीं होता
कृषि मंत्री ने पहले करनाल में कहा कि देखिए खेती खुले आसमान में होती है। प्रकृति के सिस्टम से ही खेती होती है। परमात्मा की बारिश से ही खेती होती है। हमारे बुजुर्ग तो यह कहते आए कि अगर सीधी बारिश अगर पड़ती है, बूंदाबांदी होती है तो उससे फसल को कोई नुकसान नहीं होता। नुकसान होता है भूचाल से, ओले से, आंधी-तूफान से, उससे नुकसान होता है। उसमें नुकसान होता है तो सरकार साथ खड़ी है। मैं खेती करता हूं इसलिए कह रहा हूं ये मार्च के महीने में जो मौसम था इसमें ज्यादा गर्मी पड़ती तो एवरेज गेहूं कम पड़ती। ये जो मौसम थोड़ा नरम रहा उससे एक एकड़ में प्रति एवरेज 2 क्विंटल ज्यादा अनाज रहा है। अपनी सरकार को और किसानों को कितना फायदा हुआ है बारिश से। बारिश से नुकसान कब होता है? जब आंधी-तूफान या ओला आता है। इस बारिश से बिल्कुल फायदा हुआ है। हां, जहां बारिश के साथ ओला पड़ा है वहां नुकसान हुआ है। मगर कई बार हम समझने में गलती कर देते हैं।
अंबाला में कहा- मार्च में बारिश आई इससे पैदावार बढ़ गई
अंबाला में कृषि मंत्री ने कहा कि बारिश से कभी नुकसान नहीं होता। अंधेरी से नुकसान होता है। यानि जब हवा चले, आंधी आए, तुफान आए, ओला पड़े उससे नुकसान होता है। मगर हमारे यहां जब खेती करते हैं तो यही सुनते आए हैं कि अगर सीधी-सीधी बारिश हो जाए बिना हवा के, बिना तूफान के, पकी पर हो जाए तो उसका भी झाड़ पड़ जाता है। अब ये मौसम जो 15-20 दिन से चला है, ये मौसम था गर्मी का। अगर ऐसे मौसम में जल्दी गर्मी आएगी तो जल्दी फसल पकेगी तो पैदावार की एवरेज कम हो जाएगी। मौसम ठीक रहे गीला रहे और फसल को पूरा समय मिल जाए तो 2 क्विंटल की एवरेज ज्यादा आएगी बारिश की वजह से। कम नहीं होगा अनाज। मगर कम क्या होता है आंधी-तूफान से क्योंकि वह गिर जाती है। ओलो की वजह से तो मैं नुकसान मान लेता हूं बाकि किसी तरह से बारिश का कोई नुकसान नहीं है।
पहले सिंचाई मंत्री भी इस तरह का बयान दे चुकीं
भिवानी के तोशाम रैली में 31 मार्च को सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने भी इसी तरह का बयान दिया था। इसी रैली में कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी ने भाषण देते हुए कहा था कि “प्रदेश के सीएम नायब सिंह सैनी आपका यहां पर भी आना जब होता है।
मैं देखती हूं कि इंद्र देव हमेशा खुश होते हैं और हमेशा पानी बरसता है।” इस पर कांग्रेस के नारनौंद से विधायक जस्सी पेटवाड़ ने पलटवार करते हुए कहा था कि “इस बारिश ने किसान की साल भर की मेहनत बर्बाद कर दी, लेकिन मंत्री और सीएम को इसमें भी खुशी नजर आ रही है, जमीन की हकीकत से इतनी दूरी क्यों। बता दें कि 31 मार्च को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में भी बारिश के साथ भयंकर ओलावृष्टि हुई थी जिसमें सैकड़ों गांवों में फसलें तबाह हो गई थी।
8 जिलों में 361 गांवों में फसलें तबाह
बता दें कि कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन ने 31 मार्च को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसल का सर्वे करवाया है। सर्वे में जानकारी सामने आई है कि प्रदेश के 8 जिलों के 361 गांवों में फसलें 5% से लेकर 100% तक खराब हो गई है। गेहूं, सरसों और सब्जी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। 4 मार्च को नरवाना सहित आसपास के कुछ एरिया में ओले गिरे थे। हालांकि मौसम विभाग ने 7 और 8 अप्रैल को भी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में सवाल है कि नुकसान का आंकलन कैसा लगाया जाएगा।
एक्सपर्ट बोले-बारिया से पकी हुई फसल को नुकसान
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं एक्सपर्ट सीनियर साइंटिस्ट डॉ. ओपी बिश्नोई की कृषि मंत्री से हटकर अलग राय है। डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि 31 मार्च को बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है इससे फसल को नुकसान पहुंचा है। तापमान में जो गिरावट आई है उससे सिर्फ पछेती गेहूं को फायदा होग। जिन किसानों ने दिसंबर में गेहूं की बिजाई की है उसे ही बारिश से फायदा होगा। अगेती में नुकसान पहुंचेगा। आगे अब भी बारिश आएगी इससे गेहूं को नुकसान पहुंचेगा। गेहूं पकने के बाद अगर बारिश आती है तो गेहूं के जहां बंडल किसानों ने बनाए हुए हैं उसमें नमी के कारण वह खराब हो जाएंगे। बंडल में बारिश रहती है तो नमी मिलने से गेहूं उग जाती है। जिन किसानों ने गेहूं का ढेर बना दिया तो ढेर भी बारिश के कारण उग जाता है।