हरियाणा शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दाखिला प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करते हुए अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु कम से कम 6 वर्ष होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले, 5.5 वर्ष की आयु वाले बच्चों को भी पहली कक्षा में प्रवेश दे दिया जाता था, लेकिन अब इस नियम में बदलाव कर आयु सीमा को बढ़ा दिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि यह बदलाव बच्चों के समग्र मानसिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल को जो बच्चे 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेंगे, वे सीधे पहली कक्षा में दाखिला लेने के पात्र होंगे। हालांकि, विभाग ने अभिभावकों की सुविधा के लिए 6 महीने की सशर्त रिलैक्सेशन भी दी है। इसके तहत यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल को साढ़े पांच साल का है, तो उसे प्रोविजनल दाखिला मिल सकता है, लेकिन उसकी पहली कक्षा की औपचारिक पढ़ाई तभी मान्य होगी जब वह संबंधित शैक्षणिक वर्ष के दौरान 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेगा। 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्री-प्राइमरी या फाउंडेशनल स्टेज में रखने का प्रावधान किया गया है ताकि उन पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
शिक्षा अधिकारी के अनुसार, कम उम्र में औपचारिक शिक्षा शुरू करने से बच्चों के सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 6 वर्ष की आयु तक बच्चे का मस्तिष्क और उसके अंग वातावरण से सीखने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इसी वैज्ञानिक आधार पर सरकार ने फॉर्मल एजुकेशन (पहली कक्षा) के लिए यह आयु सीमा निर्धारित की है।
नए सत्र की तैयारियों पर चर्चा करते हुए विभाग ने मिड-डे मील योजना में भी कई लुभावने और पौष्टिक बदलाव किए हैं। बच्चों को कुपोषण और एनीमिया से बचाने के लिए अब सप्ताह के अलग-अलग दिनों में विशेष डाइट दी जाएगी। मेन्यू में सप्ताह में एक दिन स्वादिष्ट पिन्नी, एक दिन इंस्टेंट खीर और दो दिन पांच अलग-अलग स्वादों वाला फ्लेवर्ड मिल्क शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, बच्चों को प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए सप्ताह में एक दिन प्रोटीन बार (मिल्क बार) भी वितरित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को न केवल शिक्षा मिले, बल्कि एक संतुलित और पौष्टिक आहार भी प्राप्त हो।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराएं। विभाग ने चेतावनी दी कि कई बार अभिभावक अनभिज्ञता के कारण ऐसे निजी स्कूलों में बच्चों को भेज देते हैं जो न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही पंजीकृत। ऐसे में बीच सत्र में बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है। इसके विपरीत, प्रदेश के सरकारी स्कूल अब आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इनमें मॉडल संस्कृति विद्यालय और पीएम श्री विद्यालय शामिल हैं जो सीबीएसई से संबद्ध हैं और जहाँ उच्च प्रशिक्षित शिक्षक कार्यरत हैं। इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की सुविधा, आधुनिक प्रयोगशालाएं और क्लस्टर स्कूलों जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
विभाग का मानना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को जो ‘एक्सपोज़र’ और मंच मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए विभाग एक विशेष मुहिम चलाएगा ताकि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाया जा सके। दाखिले के साथ ही बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी और बैग भी उपलब्ध कराए जाएंगे। अभिभावकों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग ने संदेश दिया है कि वे एक बार सरकारी शिक्षण व्यवस्था पर भरोसा जताकर देखें, जहाँ बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।