- दोनों एसआईटी लगातार धान घोटाले मामले में दबिश दे रही हैं
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : अनाज मंडियों और चावल मिलों में हुए करीब 20 करोड़ रुपए के धान घोटाले में शामिल बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को चार माह का समय लग गया। अब इनसे और बड़े अहम खुलासे होने की संभावना है। घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर, सुपरवाइजर, आढ़ती, मिलर और प्रबंधकों पर शिकंजे के बाद अब मार्केट कमेटी सचिवों और तत्कालीन डीएफएससी की संलिप्तता मिली है। कई आरोपी कानूनी सहारा लेकर बचने का प्रयास कर रहे थे लेकिन घोटाले की आपस में कड़ियां जुड़ने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों तक भी भ्रष्टाचार की आंच पहुंच गई।
धान खरीद में शामिल अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है
बड़ी बात है कि घोटाले में गिरफ्तार किए गए तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार ने कई मामलों में खुद प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। जिस मामले में उनकी गिरफ्तारी की गई है उसकी प्राथमिकी भी उन्होंने खुद दर्ज करवाई थी। अब धान खरीद में शामिल अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। दोनों एसआईटी लगातार दबिश दे रही हैं। वहीं कई आढ़ती और मिलर काफी दिनों से भूमिगत हैं।
धान खरीद मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भी गिरफ्तारी का डर सताने लगा
मंगलवार को असंध मार्केट कमेटी सचिव कृष्ण धनखड़, जुंडला के सचिव दीपक कुमार व करनाल की सचिव आशा रानी और तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार की गिरफ्तारी के बाद धान खरीद मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भी गिरफ्तारी का डर सताने लगा है। क्योंकि धान घोटाले को कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर अंजाम दिया है। अभी तक दोनों एसआईटी मंडी सुपरवाइजर, दो कर्मचारियों के अलावा दो मिलर, चार आढ़तियों की गिरफ्तारी के बाद नौ बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
घोटाले की और परतें खुलनी बाकी हैं
घोटाले की और परतें खुलनी बाकी हैं। यह ऐसा घोटाला है जिसकी रूपरेखा अनाज मंडी में धान आने से पहले ही तय कर ली जाती है। इसके लिए मार्केट कमेटी, खरीद एजेंसियां, आढ़ती, मिलर, ट्रांसपोर्टर के साथ साथ किसान की भी भागेदारी रहती है। कई किसानों का बिना बताए आढ़ती और मिलर अधिकारियों से मिलीभगत करके किसान के नाम से पंजीकरण कराकर पूरा व्यूह रच देते हैं। घोटाले को लेकर जिले में दर्ज हुई छह प्राथमिकियों की जांच के लिए एसपी नरेंद्र बिजारणियां ने दो एसआईटी का गठन किया है।
एसआईटी ने पहले आढ़तियों और मिलर की गिरफ्तारी की
एसआईटी ने पहले आढ़तियों और मिलर की गिरफ्तारी की। उनसे पूछताछ के बाद निरीक्षकों के नाम सामने आए तो छह फरवरी को खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक देवेंद्र, रणधीर, हैफेड़ प्रबंधक प्रमोद व दर्शन व वेयर हाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी की गई थी। अब मार्केट कमेटी के सचिवों के साथ साथ डीएफएससी की भी संलिप्तता है। इसी के आधार पर चारों को गिरफ्तार किया गया है। अब चारों से पूछताछ के बाद अन्य कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी होना तय माना जा रहा है।
धान घोटाले में हो चुके हैं 18 आरोपियों की गिरफ्तारी
धान घोटाले में अभी तक की जांच में 18 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। डीएसपी शहर राजीव कुमार के नेतृत्व में बनाई गई एसआईटी धान फर्जीवाड़े में मंडी के सुपरवाइजर पंकज तुली, दो कंप्यूटर ऑपरेटरों अंकुश और अंकित, आढ़ती नरेश गर्ग, देवेंद्र, महावीर और सुभाष को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा एएसपी कांची सिंघल के नेतृत्व में बनाई गई एसआईटी अभी तक असंध के दो मिलर शीशपाल और सुनील के अलावा खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक देवेंद्र, रणधीर, हैफेड़ प्रबंधक प्रमोद व दर्शन व वेयर हाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप कुमार, असंध मार्केट कमेटी सचिव कृष्ण धनखड़, जुंडला के सचिव दीपक कुमार व करनाल की सचिव आशा रानी और तत्कालीन डीएफएससी अनिल कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, जेल में बंद मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली को ब्रेन हेमरेज के बाद पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया था। वहां 20 नवंबर 2025 को उनकी मौत हो चुकी है।
फर्जी खरीद से कागजों में दिखाया स्टॉक
जांच में सामने आया है कि सरकारी रिकॉर्ड में धान की खरीद और स्टॉक पूरा दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में कई राइस मिलों में धान मौजूद ही नहीं था। कई विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों ने कागजों में फर्जी बिल, खरीद रजिस्टर और स्टॉक एंट्री तैयार की गई, जिससे सब कुछ सही प्रतीत हो रहा था। इसी फर्जीवाड़े के जरिए करीब 20 करोड़ रुपए के धान का गबन किया गया। वहीं, सरकारी विभागों में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आपसी मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया। नियमों और मानकों को ताक पर रखकर धान की खरीद, भंडारण और आगे की प्रक्रिया को कागजों में सही दिखाया गया। दूसरे जिलों से आई टीमों ने भौतिक सत्यापन किया तो स्टॉक नहीं मिला। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई शुरू हुई।