February 7, 2026
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  • 3 साल जेल काटी, 50 हजार का इनाम था
  • राजस्थान में नेता पर हमले से पहले पकड़ा

करनाल ब्रेकिंग न्यूज: हरियाणा और राजस्थान के नामी गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर के साथ कभी कंधे से कंधा मिलाकर अपराध की दुनिया में कदम बढ़ाने वाला उसके साथी दीक्षांत ने अब जरायम की दुनिया से तौबा कर ली है। अब वह पढ़ाई लिखाई कर नेक इंसान बनने की राह पर है। उसने इसका पहला पड़ाव भी पार कर लिया है।

महेंद्रगढ़ के गांव खैरोली के रहने वाले दीक्षांत ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अंग्रेजी विषय में यूजीसी नेट जेआरअफ परीक्षा में सफलता हासिल की है। बता दें दीक्षांत कभी पपला गुर्जर के उन साथियों में शामिल रहा है, जिन पर पुलिस ने 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। तीन साल जेल भी काटी, लेकिन इसके बाद उसका मन अपराध की दुनिया से उचटने लगा।

मगर, अब दीक्षांत का सपना है कि वह आगे पीएचडी की पढ़ाई पूरी कर एक अच्छे शिक्षक बनें और किसी प्रतिष्ठित कॉलेज या विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाकर देश के भविष्य निर्माण में योगदान दें। युवाओं को संदेश दिया है किकिसी भी प्रकार के लड़ाई-झगड़े में पड़कर अपना भविष्य खराब न करें।

दीक्षांत कैसे अपराध की दुनिया से दूर हुआ

पिता टीचर थे, शुरू से मेधावी रहा दीक्षांत: दीक्षांत के पिता ओमप्रकाश सरकारी टीचर थे, जो अब रिटायर हो चुके है, जबकि मां हाउस वाइफ हैं। दीक्षांत शुरू से ही मेधावी विद्यार्थी रहा है। उसने 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। इसके बाद बीएससी नाॅन मेडिकल की डिग्री प्रथम श्रेणी से पास की। फिर अंग्रेजी से एमए किया, जिसे भी फर्स्ट डिवीजन से उत्तीर्ण की। स्टूडेंट यूनियन का चुनाव भी लड़ा था।

पपला गुर्जर के संपर्क में आकर अपराध की दलदल में फंसा: पपला भी गांव खरौनी का रहने वाला है। इसी वजह से दीक्षांत भी उसके संपर्क में आ गया। मगर, 2019 में पपला बहरोड़ थाने से पपला गुर्जर के फरारी केस में नाम आने के बाद पुलिस ने दीक्षांत पकड़ा लिया था। वह वर्ष 2019 से 2021 तक वह जेल में बंद रहा।

जेल जाने के बाद आत्ममंथन किया, छोड़ी अपराध की राह : जेल में बंदी के दौरान उसने आत्ममंथन किया और अपराध से दूर जाने के लिए अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब यूजीसी नेट में सफलता प्राप्त कर उसपने अपने शैक्षणिक सफर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। साथ ही साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।

पीएचडी करने की इच्छ, ग्रामीणों ने दीं शुभकामनांए : दीक्षांत का सपना है कि वह आगे पीएचडी की पढ़ाई पूरी कर एक अच्छे शिक्षक बनें और किसी प्रतिष्ठित कॉलेज या विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाकर देश के भविष्य निर्माण में योगदान दें। उधर, गांव के लोगों ने दीक्षांत और उनके परिवार को इसके लिए शुभकामनाएं दीं। दीक्षांत ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के लड़ाई-झगड़े में पड़कर अपना भविष्य खराब न करें, बल्कि अपनी पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें ताकि वे अपने और अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर सकें।

 

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