- जिले के लगभग 58 अस्पतालों के पास नहीं फायर एनओसी, अग्निशमन विभाग दे चुका अस्पतालों को नोटिस
- पीडब्ल्यूडी को फायर एनओसी के लिए 1 करोड 74 लाख रुपट का बजट की नहीं पाई अप्रवूल
करनाल: ब्रेकिंग न्यूज
जिले में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज अस्पतालों में ईलाज के लिए आते है, लेकिन संचालित अस्पताल आग से सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं। लगभग जिले में 58 अस्पतालों के पास दमकल विभाग की ओर से दी जाने वाली एनओसी नहीं है। अस्पताल में आग बुझाने के इंतजाम हैं या नहीं, इसकी जांच ही नहीं की गई है। लापरवाही सरकारी अस्पतालों में भी है। जिला नागरिक अस्पताल को दी गई एनओसी समाप्त हो गई है। इसे रिन्यू नहीं कराया गया है। दमकल विभाग की ओर से अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिला अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 161 निजी व सरकारी अस्पताल संचालित हैं। इनमें से 103 अस्पतालों के पास ही वैध फायर एनओसी है। लगभग 58 अस्पतालों की एनओसी या तो समाप्त हो चुकी है या अब तक फायर विभाग से स्वीकृत ही नहीं करवाई गई है। इन अस्पतालों में आग बुझाने के उचित इंतजाम की जांच नहीं हुई। जिन अस्पतालों की एनओसी की अवधि पूरी हो चुकी है या जिन्होंने अब तक आवेदन नहीं किया उन्हें दमकल विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि निर्धारित समय में एनओसी रिन्यू या प्राप्त नहीं की गई तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।
अस्पताल भवनों में फायर सेफ्टी उपकरणों का इंस्टालेशन और नियमित निरीक्षण अनिवार्य है
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अस्पतालों में आग लगने की स्थिति में मरीजों की जान सबसे पहले खतरे में आती है, इसलिए अस्पताल भवनों में फायर सेफ्टी उपकरणों का इंस्टालेशन और नियमित निरीक्षण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कई निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम या तो अधूरे हैं या काम नहीं कर रहे। दमकल विभाग की ओर से जारी नोटिस में अस्पताल प्रबंधन को चेताया गया है कि वे जल्द से जल्द फायर उपकरणों को कार्यशील स्थिति में लाएं और एनओसी रिन्यू कराएं। अन्यथा अग्निशमन अधिनियम के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अस्पतालों को फायर एनओसी के लिए यह अनिवार्य
दमकल विभाग की फायर एनओसी हर उस व्यावसायिक, वाणिज्य, शैक्षणिक, स्वास्थ्य संबंधित इमारत के लिए आवश्यक होती है जिसकी ऊंचाई धरातल से ऊंचाई 15 मीटर से अधिक या 500 स्कवेयर मीटर हो। इमारत की श्रेणी भले ही किसी भी प्रकार की तैयार की गई हो। सरकारी, गैर सरकारी या अर्ध सरकारी इमारत के लिए भी एनओसी आवश्यक है। दमकल की फायर एनओसी लेने का सीधा मतलब इमारत को आगजनी रोधक होने के साथ इमारत में ऐसी घटना होने पर उचित प्रबंध होने का पुख्ता प्रमाण माना जाता है।
जिला नागरिक अस्पताल में वाटर टैंक तक नहीं सुविधा
जिला नागरिक अस्पताल करनाल में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए पूरे उपकरण तक नहीं है। अस्पताल में वाटर टैंक तक नहीं है। फायर विभाग जिला नागरिक अस्पतलों को 2 सालों में दो बार नोटिस दे चुका है। जिला नागरिक अस्पताल पीडब्ल्यूडी को फायर एनओसी के लिए 1 करेाड 74 लाख रुपट का बजट जारी कर चुका है। लेकिन अभी तक एनओसी का बजट अप्रवूल पीडब्ल्यूडी को नहीं मिल पाई है।
जिला अस्पताल की एनओसी भी समाप्त
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के पास दमकल विभाग की एनओसी है लेकिन जिला नागरिक अस्पताल की फायर एनओसी समाप्त हो चुकी है। इसे रिन्यू नहीं कराया गया है। शहर के लोगों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है कि जब जिला नागरिक अस्पताल ही सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहा तो निजी अस्पतालों से क्या उम्मीद की जाए। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इन मामलों में कठोर कार्रवाई करे ताकि भविष्य में किसी भी हादसे को टाला जा सके।
वर्जन
जिला नागरिक अस्पताल की एनओसी एक्सपायर है, इसे रिन्यू नहीं कराया गया है। इसके लिए
इनके अलावा शहर में लगभग 58 अस्पतालों के पास एनओसी नहीं है। इनको पहले नोटिस दिए जा चुके है।
-गुरमेल सिंह, जिला दमकल अधिकारी, करनाल