- खिलाड़ी खुद के खर्चे से खुराक लेने को मजबूर हैं
जिले में संचालित करीब 36 खेल नर्सरियों के 2600 खिलाड़ियों को करीब तीन करोड़ 53 लाख 60 हजार रुपए के डाइट भत्ते का इंतजार है। आठ माह का डाइट भत्ता न मिलने से खिलाड़ियों के पोषण और खेल प्रदर्शन पर असर पड़ रहा हैं।
खिलाड़ी खुद के खर्चे से खुराक लेने को मजबूर हैं। कई खिलाड़ी गरीब परिवार से आते हैं। जो पूरी तरह विभाग की ओर से मिलने वाली राशि पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उन खिलाड़ियों के लिए परेशानी हो रही है। हर खिलाड़ी को दिन में करीब 1.2-2.0 ग्राम प्रोटीन चाहिए होता है। जिसमें उन्हें सुबह के समय ओट्स, अंडे व पनीर। दोपहर के भोजन में रोटी, चावल, दाल, सलाद लेना होता है। शाम के समय फल, दही, नट्स और रात के खाने में रोटी, सब्जी, दाल और सोया शामिल है।
जिले में चल रही 82 खेल नर्सरियां
जिले में 82 नर्सरियां हैं, जिनमें से 46 निजी व 36 सरकारी नर्सरियां शामिल हैं। इनमें करीब 2600 खिलाड़ी हैं व करीब 35 कोच हैं, जो प्रतिदिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं। इनमें नियमानुसार सरकारी व निजी नर्सरियों के सभी खिलाड़ियों को प्रतिमाह डाइट के लिए विभाग की ओर से अलग से भत्ता दिया जाता है। इसके साथ ही लंबे अंतराल के बाद खिलाड़ियों को 2024 का सारा और 2025 में सिर्फ चार माह का डाइट भत्ता मिला है।
जल्द ही खिलाडियों को भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा
जिला खेल अधिकारी राजबीर रंगा ने बताया कि खिलाडियों का जो खुराक भत्ता रुका हुआ था । वह मुख्यालय की ओर से खिलाडियों के खाते में डाल दिया है। वहीं 2025 के चार माह का भत्ता भी दिया जा चुका है। अभी आठ माह का भत्ता मिलना बाकी है। जल्द ही खिलाडियों को भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा ।