प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल एक बार फिर खुलती नजर आ रही है। भीषण ठंड और घने कोहरे के बीच सरकारी अस्पतालों के सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के बाहर मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों से आने वाले मरीज और उनके तीमारदार सुबह 5:00 बजे से ही अपनी बारी का इंतजार करने के लिए कतारों में लगने को मजबूर हैं।
अस्पताल परिसर में स्थित सीटी स्कैन सेंटर के बाहर का दृश्य प्रशासन की लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यहाँ ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 20 किलोमीटर का सफर तय करके लोग कड़ाके की ठंड में पहुँच रहे हैं। विडंबना यह है कि सेंटर सुबह 9:30 बजे के बाद खुलता है, तब तक मरीजों को खुले आसमान के नीचे ठिठुरना पड़ता है। इनमें गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्हें बैठने के लिए उचित शेड या कवर्ड वेटिंग एरिया तक उपलब्ध नहीं है।
मरीजों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे कई दिनों से नंबर लगवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। एक मरीज के परिजनों ने बताया कि वे सुबह 6:30 बजे से यहाँ बैठे हैं, लेकिन कल भी उनका नंबर नहीं आया था। गर्भवती महिलाओं को इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड में घंटों बाहर खड़े रहना पड़ता है, जिससे उनकी और उनके अजन्मे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि जब अंदर वेटिंग हॉल की सुविधा है, तो उसे सुबह जल्दी क्यों नहीं खोला जाता ताकि बीमार लोगों को राहत मिल सके।
व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कई जागरूक नागरिकों ने सुझाव दिया कि इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाना चाहिए। ऑनलाइन बुकिंग होने से मरीजों को पता होगा कि उनका नंबर कब आएगा और उन्हें सुबह से आकर ठंड में परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके अलावा, एक दिन में सीटी स्कैन की संख्या भी सीमित है, जिससे दूर-दराज से आने वाले कई लोगों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है।
प्रशासन से बार-बार यह अपील की जा रही है कि कम से कम वेटिंग एरिया को कवर किया जाए और मरीजों के बैठने के लिए बेंचों की व्यवस्था की जाए। स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने आने वाले आम नागरिक को कम से कम मानवीय गरिमा के साथ सुविधाएं प्राप्त हों। यदि स्वास्थ्य विभाग इन मूलभूत समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देता, तो कड़ाके की ठंड में इलाज की आस में आए ये गरीब मरीज और भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।