करनाल के ऐतिहासिक स्थल बसताड़ा में आज मराठा समाज द्वारा भव्य ‘शौर्य दिवस’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व मराठा वीरेंद्र वर्मा ने किया, जिसमें हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के गणमान्य लोगों ने शिरकत की। यह दिवस 1761 में पानीपत के तीसरे युद्ध के दौरान राष्ट्र रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले मराठा योद्धाओं की स्मृति में मनाया जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत एक विशेष यज्ञ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। यज्ञ संपन्न होने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मराठा वीरेंद्र वर्मा ने बसताड़ा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इतिहास की पुस्तकों के अनुसार, 1761 के युद्ध के दौरान यही स्थान मराठा सेना का ‘बेस कैंप’ हुआ करता था। युद्ध के उस भीषण दौर में अहमद शाह अब्दाली की सेना से बचने और अपनी पहचान सुरक्षित रखने के लिए मराठा योद्धाओं ने इन्हीं क्षेत्रों में शरण ली थी, जो कालान्तर में ‘रोड’ समाज के रूप में पहचाने गए।
वर्मा ने आगे कहा कि इस स्थान का नाम ‘शौर्य तीर्थ बसताड़ा’ रखा गया है और इसे आने वाले समय में एक बड़े शौर्य तीर्थ के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि शायद ही कोई मराठा परिवार ऐसा होगा जिसका कोई सदस्य इस पावन भूमि पर राष्ट्र की रक्षा करते हुए शहीद न हुआ हो। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज और राजमाता जीजाऊ के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
शौर्य दिवस के इस अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने आए लोगों ने गौ सेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प भी लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के बलिदान से अवगत कराना है। कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर समाज में आपसी सौहार्द और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।