- शिव चित्रगुप्त मंदिर सदर बाजार में साप्ताहिक कार्यक्रम
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से शिव चित्रगुप्त मंदिर सदर बाजार में साप्ताहिक कार्यक्रम में श्री गुरु आशुतोष महाराज के शिष्या साध्वी यशोदा भारती ने कहा कि अंतरात्मा हर व्यक्ति की पवित्र होती है, दिव्य होती है। यहां तक की दुष्ट से दुष्ट मनुष्य की भी ।आवश्यकता केवल इस बात की है कि उसके विकार ग्रस्त मन का परिचय उसके इस सच्चे, विशुद्ध आत्म स्वरूप से कराया जाये।
उन्नत स्वभाव यानी समत्व, संतुलन और शांति की दिशा में उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है
यह परिचय बाहरी साधनों से संभव नहीं है। केवल ‘ब्रह्मज्ञान’ की प्रदीप्त अग्नि ही व्यक्ति के हर पहलू को प्रकाशित कर सकती है। यही नहीं, आदमी के नीचे गिरने की प्रवृत्ति को ब्रह्मज्ञान की सहायता से ऊर्ध्वमुखी या ऊंचे उठने की दिशा में मोड़ा जा सकता है। इससे वह एक योग्य व्यक्ति और सच्चा नागरिक बन सकता है। ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के बाद साधना करने से आपकी सांसारिक जिम्मेदारियां दिव्य कर्मों में बदल जाती है आपके व्यक्तित्व का अंधकारमय पक्ष दूर होने लगता है। विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है और नकारात्मक प्रवृत्तियां दूर होती जाती है। अच्छे और सकारात्मक गुणों का प्रभाव आपके अंदर बढ़ने लगता है। वासनाओं, भ्रांतियां और नकारात्मकताओ में उलझा मन आत्मा में स्थित होने लगता है। वह अपने उन्नत स्वभाव यानी समत्व, संतुलन और शांति की दिशा में उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है यही ‘ब्रह्मज्ञान’ की सुधारवादी प्रक्रिया है ।
दिव्यनेत्र को खोल कर, आपको ब्रह्मधाम तक ले जा सकते हैं
अगर हम जीवन का यह वास्तविक तत्व यानी ‘ब्रह्मज्ञान’ प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें सच्चे सद्गुरु की शरण में जाना होगा। वह आपकी ‘दिव्यनेत्र’ को खोल कर, आपको ब्रह्मधाम तक ले जा सकते हैं, जहां मुक्ति और आनंद का साम्राज्य है सच्चा सुख हमारे अंदर ही विराजमान है, लेकिन उसका अनुभव हमें केवल एक युक्ति द्वारा ही हो सकता है, जो पूर्ण गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है। इसीलिए ऐसा कहना अतिशयोक्ति न होगा कि सतगुरु संसार और शाश्वत के बीच सेतु का काम करते हैं। वे क्षणभंगुरता से स्थायित्व की ओर ले जाते हैं। हमें चाहिए कि हम उनकी कृपा का लाभ उठाकर अपना जीवन सफल बना ले।