हरियाणा के करनाल जिले में स्थित सरकारी नागरिक अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आई है। अस्पताल में सुबह से ही बिजली गुल होने और फिर सर्वर ठप पड़ जाने के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस अव्यवस्था के बीच इलाज की उम्मीद में घंटों से कतार में खड़ी एक बीमार महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी, जिससे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करनाल और आसपास के गांवों जैसे पानीपत, इंद्री, फुसगढ़ और बिजना से आए सैकड़ों मरीज सुबह 7 बजे से ही अस्पताल की ओपीडी की पर्ची कटवाने के लिए कतारों में लगे हुए थे। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद लोग इस उम्मीद में आए थे कि उन्हें समय पर डॉक्टरी परामर्श मिल सकेगा। हालांकि, अस्पताल की बिजली गुल होने के कारण पर्ची काटने का काम पूरी तरह से ठप रहा। काफी देर बाद जब बिजली आई, तो सर्वर डाउन होने की समस्या खड़ी हो गई, जिसके चलते घंटों तक एक भी पर्ची नहीं काटी जा सकी।
इन्हीं लंबी कतारों में अपने पति के साथ इलाज के लिए आई एक महिला ठंड और शारीरिक कमजोरी को बर्दाश्त नहीं कर सकी और कतार में ही अचेत हो गई। महिला की हालत बिगड़ती देख वहां मौजूद अन्य मरीजों ने शोर मचाया, जिसके बाद उसके पति ने उसे गोद में उठाकर तुरंत इमरजेंसी वार्ड की ओर दौड़ लगाई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि महिला करीब डेढ़ घंटे से ठंड में खड़ी थी और पर्ची न कटने के कारण उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका।
अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कतारों में खड़े बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि वे ठंड में ठिठुरते हुए घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन काउंटर पर कोई भी कर्मचारी पर्ची काटने के लिए मौजूद नहीं था। कुछ मरीजों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक तरफ देश को विश्व गुरु बनाने की बातें होती हैं और दूसरी तरफ एक जिले के मुख्य सरकारी अस्पताल में बिजली और सर्वर का कोई वैकल्पिक बैकअप नहीं है।
जब इस संबंध में अस्पताल के कर्मचारियों से बात की गई, तो उनका कहना था कि सर्वर की समस्या सीधे चंडीगढ़ मुख्यालय से जुड़ी है, जिस कारण वे मैनुअल पर्ची नहीं काट सकते। हालांकि, मरीजों का तर्क था कि आपातकालीन स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी ताकि बीमार लोगों को घंटों तक कड़ाके की ठंड में न खड़ा होना पड़े।
अस्पताल में फैली इस अव्यवस्था के कारण कई मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौटने को मजबूर हो गए। कुछ मरीजों ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से इसी तरह चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कभी लंच टाइम तो कभी तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है। इस पूरी घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खोल दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक तकनीक पर निर्भरता के बीच यदि कोई वैकल्पिक व्यवस्था न हो, तो आम जनता को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।