करनाल जिले के असंध क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाँव जलमाना (भिक्खी) ने मानवता और सामुदायिक एकता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। गाँव के गुरुद्वारे में पिछले 35 वर्षों से सेवा कर रहे ग्रंथि सिंह को ग्रामीणों और विदेशों में रह रहे अनिवासी भारतीय (NRI) परिवारों ने उनके निस्वार्थ समर्पण के सम्मान में ₹35 लाख की लागत से बना एक आलीशान घर उपहार स्वरूप भेंट किया है।
ग्रंथि सिंह वर्ष 1993 से जलमाना के गुरुद्वारा सिंह सभा में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। उन्होंने न केवल गुरुद्वारे की मर्यादा को संभाला, बल्कि गाँव के बच्चों और युवाओं को गुरुबाणी, पाठ और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे प्रतिदिन बच्चों को दो घंटे गुरुबाणी सिखाते हैं, जिससे गाँव की नई पीढ़ी अपने धर्म और संस्कारों से जुड़ी हुई है। ग्रामीणों का मानना है कि जो व्यक्ति दशकों से समाज को भगवान और आध्यात्मिकता की राह दिखा रहा है, उसकी सुख-सुविधाओं का ध्यान रखना पूरे समाज का दायित्व है।
इस नेक कार्य के लिए गाँव के 11 सदस्यों की एक विशेष समिति का गठन किया गया था। इस समिति के माध्यम से जलमाना गाँव के उन परिवारों से संपर्क किया गया जो अब विदेश (कनाडा, अमेरिका आदि) में बस चुके हैं। ग्रंथि सिंह के प्रति अपार श्रद्धा दिखाते हुए इन NRI परिवारों और स्थानीय निवासियों ने दिल खोलकर दान दिया। देखते ही देखते ₹35 लाख की बड़ी राशि एकत्रित हो गई, जिससे ग्रंथि सिंह और उनके परिवार के लिए सभी आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त एक सुंदर घर तैयार किया गया। इसमें न केवल भवन निर्माण शामिल है, बल्कि ग्रामीणों ने अपनी ओर से फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया है।
नए घर के गृह प्रवेश और शुभ मुहूर्त के अवसर पर गाँव में मेले जैसा माहौल रहा। इस खुशी को मनाने के लिए अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया गया, जिसका भोग आज डाला गया। इस दौरान भव्य कीर्तन और कथा का आयोजन हुआ, जिसमें गाँव की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में शिरकत की। पाठ की समाप्ति के बाद विशाल भंडारे (लंगर) का आयोजन किया गया, जहाँ पूरी संगत ने बड़े प्रेम से प्रसाद ग्रहण किया।
ग्रंथि सिंह ने इस अवसर पर भावुक होते हुए समस्त ग्रामवासियों और विशेष रूप से NRI वीरों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा और संगत के प्रेम के कारण ही उन्हें यह नया आशियाना मिला है। वहीं, गाँव के नंबरदार और अन्य प्रबुद्ध नागरिकों ने कहा कि यह कदम अन्य गाँवों और समुदायों के लिए भी एक संदेश है कि हमें अपने धर्म प्रचारकों और समाज सेवा करने वालों का सम्मान करना चाहिए। यह घटना दर्शाती है कि यदि समाज में एकता और सकारात्मक सोच हो, तो बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है और मानवता की सच्ची सेवा की जा सकती है।