हरियाणा के करनाल में नेशनल हाईवे पर इन दिनों कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मानवता की एक बेमिसाल तस्वीर देखने को मिल रही है। सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के महान बलिदान को याद करते हुए, तरावड़ी के पास नेशनल हाईवे पर विशाल लंगर का आयोजन किया जा रहा है। पिछले 14 वर्षों से स्थानीय निवासियों और सेवादारों के सहयोग से यह परंपरा अनवरत चली आ रही है।
इस भीषण सर्दी में हाईवे से गुजरने वाले हजारों मुसाफिरों के लिए सेवादार दिन-रात समर्पित हैं। लंगर में विशेष रूप से गरमा-गरम ब्रेड पकौड़े, मिक्स पकौड़े, कढ़ी-चावल और चाय का प्रसाद तैयार किया जा रहा है। सेवादारों का कहना है कि यह लंगर 24 दिसंबर से 28 दिसंबर तक पांच दिनों के लिए 24 घंटे लगातार चलता है। इस पुनीत कार्य में पुरुष सेवादारों के साथ-साथ महिला सेवादार भी पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं, जो भोजन तैयार करने से लेकर वितरण तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
श्रद्धा और सेवा का यह संगम केवल भोजन वितरण तक ही सीमित नहीं है। सुरक्षा की दृष्टि से हाईवे पर विशेष सावधानी बरती जा रही है। सेवादारों ने ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए रेडियम जैकेट्स पहनी हुई हैं, ताकि कोहरे और धुंध के दौरान किसी प्रकार की सड़क दुर्घटना न हो। वे आने-जाने वाले वाहनों को सुरक्षित तरीके से किनारे लगवाकर लंगर का प्रसाद ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करते हैं।
इलाका निवासियों का कहना है कि इस लंगर की खास बात यह है कि इसमें उन युवाओं का भी बड़ा योगदान है जो अब विदेश में पढ़ाई या नौकरी कर रहे हैं, लेकिन उनकी श्रद्धा इस माटी और साहिबजादों के बलिदान से जुड़ी हुई है। सेवादारों ने वाहन चालकों से भी अपील की है कि वे हाईवे पर लंगर के समीप अचानक ब्रेक न मारें, बल्कि सावधानी से अपनी गाड़ी साइड में लगाकर ही प्रसाद लें। यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि इस हाड़ कपा देने वाली ठंड में मुसाफिरों के लिए एक बड़ा सहारा भी साबित हो रहा है।