करनाल: कुंजपुरा रोड पर महावीर दल अस्पताल के सामने कार और एक्टिवा के मामूली टच से शुरू हुआ विवाद देखते–देखते इतना बढ़ गया कि लाठी–डंडों से हमला, दो बार मारपीट और पुलिस की मौजूदगी में भी खुलेआम गुंडागर्दी के आरोप तक पहुंच गया। SHO सहित सिटी थाने की पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दूसरी बार हुई मारपीट के दौरान पुलिसकर्मी सिर्फ वीडियो बनाते रहे, बीच–बचाव में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई।
पार्किंग–टच से शुरू हुआ झगड़ा, लोगों के अनुसार 15–20 युवक लौटकर पहुंचे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुरुआत कार की पार्किंग/टच को लेकर हुई कहासुनी से हुई। एक पक्ष का कहना है कि गाड़ी मुड़ रही थी, टक्कर हुई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं, लेकिन दूसरी तरफ से गाली–गलौज (मां–बहन की गाली) दी गई, जिस पर बात बढ़ गई और हाथापाई हो गई। बाद में एक पक्ष के लोग वहां से चले गए और बताया गया कि कुछ समय बाद वे 15–16 लड़कों को दो गाड़ियों में लेकर दोबारा मौके पर लौटे और दुकान पर बैठे व्यक्ति और उसके चाचा/परिजन पर हमला कर दिया।
दुकानदार का कहना है कि पहली बार झगड़े के बाद लोगों ने बीच–बचाव कर गाड़ियों को भेज दिया था, लेकिन “दूसरी बार दुकान में घुसकर छह–सात लड़कों ने रोड से हमला किया, मुंह से खून निकल आया, अब मेडिकल कराने जा रहा हूं।”
“सरेआम गुंडागर्दी, पुलिस बस वीडियो बनाती रही” – महिलाओं और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप
एक महिला प्रत्यक्षदर्शी ने भावुक होकर बताया कि उनके सामने एक व्यक्ति को “अंदर जाकर बुरी तरह मारा गया, सिर फट गया, अस्पताल ले जाया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने न तो बीच–बचाव किया, न ही पहली बार मारपीट के बाद हमलावरों पर तुरंत काबू पाने की कोशिश की, बल्कि कहा, “हम दो आदमी क्या कर सकते हैं, पुलिस को बुलाया है।”
महिला का आरोप था कि दूसरी बार जब 15–20 लड़के दोबारा आए और हमला किया, तब भी वे बार–बार पुलिस से कहती रहीं, “बचाओ, इसको मार देंगे”, लेकिन पुलिसकर्मी पीछे हटते रहे और कहने लगे “हम कैसे जाएं, हमें भी मार देंगे, आप छुड़वा लो।” उन्होंने इसे “वर्दी का डर खत्म होना” बताते हुए कहा, “मैंने कहा तुम वर्दी किस लिए पहनते हो? वर्दी का तो खौफ होना चाहिए।”
एक अन्य युवक ने भी कहा कि पुलिसकर्मी वहीं खड़े होकर सिर्फ वीडियो बना रहे थे, जबकि दुकानदार को छः–सात लोगों ने पीटा, “जानवर को भी ऐसे नहीं मारते।”
“हमने झगड़ा छुड़वाया, पुलिस ने सिर्फ देखा” – राहगीरों की भी नाराज़गी
कुछ राहगीरों ने बताया कि वे मौके पर अचानक पहुंचे और तब झगड़ा चल रहा था, उसी समय उन्होंने लाठी–डंडे छुड़वाकर दोनों पक्षों को अलग किया और गाड़ियां हटवाईं। उनके अनुसार, “हमने कहा आप अपनी–अपनी गाड़ी ले जाओ, झगड़ा मत करो, उनकी गाड़ी भी हमने भिजवा दी; उसके बाद जो लोग हमला करने आए, वो बाद में दूसरी गाड़ियों में पहुंचे और दुकान पर जाकर मारपीट की, तब पुलिस मौजूद थी।” उनका आरोप था कि दूसरी बार हुई मारपीट के दौरान पुलिसकर्मियों ने समय रहते किसी तरह की प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित पक्ष का बयान – “पहले सड़क पर, फिर दुकान में आकर मारा”
दुकान से जुड़े युवक ने बताया कि शुरू में सड़क पर गाड़ी/एक्टिवा को लेकर बहस हुई थी, “गाड़ी लगी भी नहीं थी, बस बहस हुई थी।” उनका कहना है कि उन्होंने हाथ जोड़कर दूसरे पक्ष को गाली देने से रोका और उनके पिता से भी कहा कि आप बड़े हो, गाली मत दो, लेकिन बात नहीं मानी गई।
युवक ने आरोप लगाया कि पहले सड़क पर हाथापाई हुई, फिर हमलावर लोग वहां से चले गए, लेकिन बाद में “मेरी दुकान पर आकर” छह–सात युवकों ने दोबारा हमला किया, रोड से चोट पहुंचाई, मुंह से खून निकला और अब अंदरूनी दर्द अधिक है, इसलिए मेडिकल के लिए जा रहा हूं।
पुलिस कह रही – शिकायत के आधार पर होगी कार्रवाई, CCTV खंगाले जाएंगे
मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि उन्हें कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी, जिस पर वे टीम के साथ मौके पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक मामला गाड़ी के टच/कहासुनी से शुरू हुआ है, आगे की कार्रवाई लिखित शिकायत आने पर और तथ्य स्पष्ट होने के साथ अमल में लाई जाएगी।
पुलिस ने बताया कि आसपास लगे CCTV कैमरे खंगाले जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूसरी बार हमला करने वाले युवक कौन थे, कितने लोग थे और उनकी पहचान क्या है। साथ ही, पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस पर लगाए जा रहे वीडियो बनाने और न रोकने वाले आरोपों की भी जांच की जाएगी, “हमने भी वीडियो बना रखा है, आपसे भी फुटेज लेंगे।”
मामूली टच से बढ़कर लाठी–डंडों तक पहुंचा विवाद
रिपोर्ट के समापन में यह साफ दिखा कि एक हल्की–सी गाड़ी/एक्टिवा टच और कहासुनी से शुरू हुई बात किस तरह कुछ ही देर में दो चरणों की मारपीट, लाठी–डंडों से हमले, सिर फूटने और पुलिस–जनता के बीच अविश्वास के आरोप तक पहुंच गई।
कुंजपुरा रोड जैसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती हैं कि मामूली सड़क–विवादों को समय रहते शांत करने, भीड़ के रूप में लौटकर हमले करने वालों की पहचान करने और मौके पर मौजूद पुलिस बल की भूमिका को किस तरह और अधिक जवाबदेह और सक्रिय बनाया जाए।