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(मालक सिंह) करनाल में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी नहीं रुक रही पटाखों की बिक्री। जिन गोदामों पर दिन की रोशनी में लगे दिखते है, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना के बैनर, रात के अंदेरे में वही पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रॉकेट की तरह हवा में उड़ा रहे है कुछ लोग। करनाल पुलिस ने पटाखों की बिक्री करने वालो और निर्धारित समय के बाद पटाखे बजाने वालो पर सख्त कार्यवाही करने के लिये बनाई है 6 टीम्स। पुलिस ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मद्देनज़र एन सी आर के हिस्से करनाल में कोई छापेमार कार्यवाही नहीं की है।
हालाकि पटाखे बजाने पर कोई बैन नहीं है। लोग कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व कैथल से पटाखे खरीद कर निर्धारित टाइम पर इन्हें बजा सकते है। करनाल समेत हरियाणा के 13 जिलो में पटाखों का व्यपार नहीं कर सकते। करनाल ब्रेकिंग न्यूज़ की इंवेस्टिगेटिंग रिपोर्टिंग से सामने आया कि कुछ लोग गाड़ियों में पटाखे भर कर रात को निकलते है, और कुछ निर्धारित स्थानों पर पटाखों को महंगे दामो पर बेच रहे है।
करनाल में पटाखा दलाल भी एक्टिव हो गए है, जो कि कस्टमर लगने की स्थिति में कोड वर्ड में बात करते है और फिर कस्टमर को पटाखे मिलने का स्थान और समय बता देते है। एक नौजवान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट को आर्डर 4 महीने पहले निकलना चाहिए था
कुछ लोग तो व्हाट्सएप और फ़ोन पर आर्डर ले लोगो के घर पटाखों की होम डिलीवरी भी कर रहे है। कैश ऑन डिलीवर से ले रहे भुगतान राशी।
पटाखे बजा कर दीवाली मनना लोगों की जेब को ज्यादा ढीला कर रहा है। लोग पटाखे खरीदेने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे है।
करनाल से यमुनानगर की दूरी- 64 किलोमीटर
करनाल से कैथल की दूरी-71 किलोमीटर
करनाल से कुरुक्षेत्र की दूरी-35 किलोमीटर
एक व्यक्ति ने बताया कि बडे तो पटाखों के दुष्प्रभावों को समझते है। पर बच्चों को तो बस पटाखे चाहिए, चोरी से पटाखे खरीदे है वह भी कई गुना महंगे दाम पर। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस प्रतिबंध के साथ ये देखना चाहता है कि क्या दिवाली से पहले पटाखों के बिक्री पर बैन से प्रदूषण में कमी आती है या नहीं. लेकिन पटाखे जलाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. जिन लोगों ने पहले से पटाखों की खरीदारी कर ली है वो इसे जला सकते हैं.
पटाखों की बिक्री पर बैन की याचिका तीन बच्चो की ओर से दायर की गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन बच्चों के फेफड़े दिल्ली में प्रदूषण के कारण ठीक से विकसित नहीं हो पाए हैं. इस मामले में वकील और याचिकाकर्ता हरिप्रिया पद्मनाभन का कहना है, “सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से वो बेहद खुश हैं. इस फ़ैसले से किसी को नुकसान नहीं होगा. जिन दुकानदारों ने पटाखे खरीद रखे हैं, वो अपने पटाखे दिल्ली-एनसीआर के बाहर बेच सकते हैं.”

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