- CCTV कैमरों से वीडियो फुटेज पाकिस्तान जा रहे थे
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी रैकेट के खुलासे के बाद CCTV सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। जांच में सामने आया कि संवेदनशील जगहों पर लगाए गए कैमरों का लाइव फुटेज सीमा पार पाकिस्तान भेजा जा रहा था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने देशभर में CCTV नेटवर्क की जांच का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने आईबी और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर के CCTV नेटवर्क का ऑडिट शुरू करने की तैयारी में है।
वहीं, 1 अप्रैल से सिर्फ हैकिंगप्रूफ कैमरे ही बिकेंगे, जो सरकारी सुरक्षा जांच (STQC सर्टिफिकेशन) पास करेंगे। भारत में 80% कैमरे चीन के हैं, जिनसे डेटा चोरी का खतरा बना रहता है। फिलहाल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही ऐसे हैं, जिन्हें सर्टिफाइड और सुरक्षित माना गया है।
आम लोगों की प्राइवेसी पर भी खतरा
CCTV सिस्टम से निजी डेटा लीक होने के मामले भी सामने आए हैं। इजराइल की ओर से ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर वीआईपी मूवमेंट ट्रैक करने का उदाहरण सामने आ चुका है।
वहीं, सोनीपत रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति ने निगरानी सिस्टम में घुसपैठ कर कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की और यात्रियों की फुटेज रिकॉर्ड कर उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। यह सीधे तौर पर निजता का उल्लंघन है। 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत किसी व्यक्ति की पहचान उजागर करने वाले फुटेज का गलत इस्तेमाल गैरकानूनी है।
भारत से पाकिस्तान कैसे भेजा जा रहा था फुटेज
हाल ही में यूपी के गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में एक बीट कॉन्स्टेबल की सूचना के बाद जासूसी का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि सोलर पावर से चलने वाले छोटे कैमरे संवेदनशील इलाकों के आसपास लगाए गए थे।
ये कैमरे इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से जुड़े थे। उनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
इस मामले में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेटवर्क में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे। कई कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
स्टैंटर्ड प्रोटोकॉल की कमी
जांच में सामने आया कि देशभर में CCTV अलग-अलग एजेंसियों के लगाए गए हैं, लेकिन कोई एकीकृत डेटाबेस या स्पष्ट नियंत्रण प्रणाली नहीं है। यही वजह है कि कई जगह निगरानी तंत्र में खामियां बनी हुई हैं, जो अब सुरक्षा जोखिम बन चुकी हैं।
ऑडिट रिपोर्ट के बाद सरकार यूनीक रजिस्ट्रेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और साइबर सुरक्षा मानकों के साथ एकीकृत नेटवर्क सिस्टम लागू कर सकती है।
CCTV कैमरों को लेकर कुछ जरूरी बातें…
घर-दुकान, संस्थान में CCTV लगा है तो नोटिस बोर्ड लगाना भी जरूरी- आप CCTV की निगरानी में हैं।
अधिकतम 90 दिन तक CCTV फुटेज सेव रखना होता है। उसके बाद डिलीट कर सकते हैं।
CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर डालना कानूनी अपराध है।
CCTV पड़ोसी के घर की तरफ नहीं लगा सकते। यह निजता का उल्लंघन होगा।
भारत में STQC कैमरों को सर्टिफाइड करती है
STQC यानी स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन डायरेक्टोरेट भारत सरकार की एक संस्था है, जो इलेक्ट्रॉनिक और IT उत्पादों की क्वालिटी, सुरक्षा और भरोसेमंद होने की जांच करती है।
यह IT मंत्रालय के तहत काम करती है। इस संस्थान का काम CCTV जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की टेस्टिंग, सॉफ्टवेयर और सिस्टम की क्वालिटी जांच, साइबर सिक्योरिटी और डेटा सुरक्षा की जांच करती है।
CCTV कैसे काम करता है…
कैमरा वीडियो कैप्चर करता है, उसे डिजिटल सिग्नल में बदलता है।
फुटेज को DVR/NVR या क्लाउड में स्टोर करता है।
इसे मोबाइल/स्क्रीन पर लाइव या रिकॉर्डिंग देख सकते हैं।
इंटरनेट के जरिए डेटा ट्रांसफर, इसलिए इसे कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं।
CCTV असुरक्षित क्यों हो सकते हैं
डिफॉल्ट पासवर्ड न बदला जाए, क्योंकि इसे इन्स्टॉल करने वाली कंपनी भी जानती हैं।
सस्ता/लोकल ब्रांड लगाना, जिसका कोई सिक्योरिटी टेस्ट नहीं हुआ हो।
इंटरनेट से सीधे कनेक्ट होने पर हैकिंग का खतरा ज्यादा होता है।
डेटा एन्क्रिप्शन नहीं होता, मोबाइल एप असुरक्षित होते हैं। खासकर IP कैमरे जोखिम ज्यादा