जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान माता वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धा और भक्ति का एक ऐसा अनूठा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद हर श्रद्धालु की आँखों में सम्मान और प्रेरणा के भाव भर दिए। अवसर था गीतांजलि फाउंडेशन द्वारा आयोजित सातवीं धार्मिक महायात्रा का, जिसमें दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लगभग 50 से अधिक दिव्यांगों ने हिस्सा लिया। इन श्रद्धालुओं ने शारीरिक अक्षमताओं को दरकिनार करते हुए व्हीलचेयर के माध्यम से कटरा से भवन तक की 15 किलोमीटर की अत्यंत कठिन और घुमावदार चढ़ाई को सफलतापूर्वक पूरा किया।
गीतांजलि फाउंडेशन की संस्थापिका और सीईओ अर्चना झा के नेतृत्व में निकली इस यात्रा का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना है। अर्चना झा ने बताया कि उनकी संस्था पिछले सात वर्षों से निरंतर इस तरह की यात्राओं का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया दिव्यांगता को एक अभिशाप या रुकावट मानती है, वहीं उनके ये बच्चे अपने जज्बे से यह सिद्ध करते हैं कि “डिसेबिलिटी इज नॉट डिसेबिलिटी, डिसेबिलिटी इज एबिलिटी”। उनके अनुसार, इन बच्चों की मुस्कान और उत्साह उन्हें स्वयं भी ऊर्जा प्रदान करता है।
यात्रा में शामिल दिव्यांगजनों के चेहरे पर थकान के बजाय एक दिव्य चमक और माता के दर्शन की तड़प स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। दिल्ली के भजनपुरा से आए धर्मवीर सिंह और राजकुमार शर्मा ने बताया कि वे इस यात्रा के लिए पिछले कई दिनों से उत्साहित थे। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे चल नहीं सकते, लेकिन माता की कृपा और गीतांजलि फाउंडेशन के सहयोग ने उन्हें वह हिम्मत दी जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। हरियाणा व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान कल्याण छाबड़ा ने भी अन्य दिव्यांगों से आह्वान किया कि वे स्वयं को कमजोर न समझें और घरों से बाहर निकलकर दुनिया का सामना करें।
यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह आपसी भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का भी एक बेहतरीन उदाहरण बनी। यात्रा के दौरान कई ऐसे क्षण आए जब एक दिव्यांग दूसरे का सहारा बन रहा था। दिल्ली के ही एक अन्य प्रतिभागी ने, जो संस्कृत के विद्वान हैं, यात्रा के दौरान ‘मनुष्य रूपेण मृगाश्चरन्ति’ जैसे श्लोकों के माध्यम से जीवन के सार को समझाया और बताया कि परोपकार और ज्ञान ही मनुष्य को पशुओं से अलग बनाता है। उनके भजनों और जयकारों से पूरा मार्ग ‘जय माता दी’ की गूँज से सराबोर रहा।
मौसम की चुनौतियों और चढ़ाई की दुर्गमता के बावजूद, इन श्रद्धालुओं ने अपनी व्हीलचेयर को ही अपना विमान बना लिया। कटरा से अर्द्धकुंवारी और फिर वहाँ से भवन तक का सफर तय करते समय रास्ते में मिले अन्य तीर्थयात्रियों ने रुक-रुक कर इन विशेष श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। प्रशासन ने भी इन यात्रियों के लिए विशेष सुगमता सुनिश्चित की।
माता वैष्णो देवी के भवन पर पहुँचकर जब इन दिव्यांगों ने माता के चरणों में शीश नवाया, तो उनके संघर्ष की थकान भक्ति के आँसुओं में बह गई। उन्होंने आगामी नवरात्रों के उपलक्ष्य में पूरे देश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। यह यात्रा उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों से हार मान लेते हैं। इन वीर श्रद्धालुओं ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प हो, तो पर्वत क्या, दुनिया की हर चोटी को फतह किया जा सकता है।
Ground Report By Guest Anchor Sarthak Midha