March 13, 2026
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हरियाणा के करनाल जिले में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें और लोगों का आक्रोश वितरण व्यवस्था की पोल खोल रहा है। आलम यह है कि लोग अपनी दिहाड़ी और घर के जरूरी काम छोड़कर सुबह 5 से 6 बजे के बीच ही खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों के बाहर जमा हो रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे पिछले तीन-चार दिनों से लगातार चक्कर काट रहे हैं, फिर भी उन्हें भरा हुआ सिलेंडर नसीब नहीं हो रहा है।

एजेंसियों के बाहर का नजारा बेहद विचलित करने वाला है। जहाँ पुरुष अपनी काम की दिहाड़ी छोड़कर कतारों में खड़े हैं, वहीं महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को घरों पर अकेला छोड़कर या साथ लाकर गैस मिलने की उम्मीद में घंटों सड़क पर बैठी हैं। उपभोक्ताओं के हाथों में 5 से 6 दिन पहले कटवाई गई गैस की रसीदें (पर्चियां) हैं, लेकिन एजेंसी संचालक और कर्मचारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि उन्हें कभी सुबह 9 बजे, कभी दोपहर 2 बजे तो कभी अगले दिन आने का समय देकर बार-बार दौड़ाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि एजेंसियों के गेट पर ताले लटके हुए हैं और कोई भी अधिकारी जनता की समस्या सुनने के लिए उपलब्ध नहीं है।

किल्लत का असर आम आदमी की रसोई पर सीधा पड़ रहा है। कई परिवारों के पास खाना बनाने तक के लिए गैस खत्म हो चुकी है, जिसके कारण बच्चों के स्कूल जाने और घर में भोजन तैयार करने में भारी कठिनाई आ रही है। एक महिला उपभोक्ता ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पास घर में बिल्कुल गैस नहीं बची है और वे इसी उम्मीद में सुबह 6 बजे से लाइन में लगी हैं कि शायद आज चूल्हा जल सके। वहीं, कुछ लोगों ने अव्यवस्था और पक्षपात के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जो लोग घंटों से लाइन में लगे हैं, उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि कुछ चहेते लोग पिछले दरवाजे से सिलेंडर लेकर जा रहे हैं।

उपभोक्ताओं का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि जब सिलेंडर स्टॉक में नहीं होते, तो उनकी बुकिंग क्यों की जा रही है और पर्चियां क्यों काटी जा रही हैं। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन को वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी चाहिए और उतनी ही बुकिंग स्वीकार करनी चाहिए जितनी गैस उपलब्ध है। फिलहाल, गैस संकट गहराता जा रहा है और जनता के सब्र का बांध टूट रहा है। यदि जल्द ही आपूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो स्थिति और भी तनावपूर्ण हो सकती है। प्रशासन और संबंधित विभागों को इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आमजन को इस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।

Ground Report By Deepali Dhiman

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