करनाल के दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। रायपुर जटान गांव का रहने वाला सोमवीर अपने परिवार के साथ बाइक पर जा रहा था, तभी एक तेज रफ्तार टेंपो ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भीषण था कि सोमवीर की गर्दन बुरी तरह कट गई और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हालांकि, इस हृदयविदारक घटना में चमत्कारिक रूप से उसकी पत्नी और छोटी बच्ची सुरक्षित बच गए, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, यह हादसा शाम करीब 5:55 बजे हुआ। टक्कर के बाद सोमवीर सड़क पर गिरकर तड़पता रहा। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि घटना के करीब आधे घंटे तक न तो कोई सरकारी एंबुलेंस पहुंची और न ही हाईवे से गुजर रहे किसी वाहन चालक ने घायल को अस्पताल पहुंचाने की जहमत उठाई। सोमवीर की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है; उन्होंने बताया कि वे किसी काम से अस्पताल जा रहे थे, तभी पीछे से आए टेंपो ने उन्हें कुचल दिया। यदि समय रहते सोमवीर को प्राथमिक उपचार मिल जाता या कोई उसे अपनी गाड़ी में डालकर अस्पताल ले जाता, तो शायद आज एक बच्चे के सिर से पिता का साया नहीं उठता।
हादसे की सूचना मिलने के काफी देर बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। तब तक सोमवीर की सांसें थम चुकी थीं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की व्यवस्था और सड़क पर चलने वाले लोगों की संवेदनहीनता पर कड़े सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि ‘सीएम सिटी’ कहलाने वाले करनाल में भी आपातकालीन सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस और एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन मदद पहुंचने में काफी देरी हुई। इस दौरान हाईवे पर लंबा जाम लग गया और पुलिस ने बड़ी मुश्किल से यातायात को सुचारू करवाया।
हादसे को अंजाम देने वाला टेंपो कुछ दूरी पर जाकर रुक गया था क्योंकि टक्कर के बाद उसका टायर पंचर हो गया था। पुलिस ने टेंपो को अपने कब्जे में ले लिया है और चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवीर के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। घटना स्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज भिजवा दिया है।
यह हादसा एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि नेशनल हाईवे पर सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। साथ ही, समाज में घटती संवेदनाओं का आलम यह है कि लोग घायल की मदद करने के बजाय तमाशबीन बने रहते हैं या वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं। सोमवीर की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता और मानवीय संवेदनहीनता का भी परिणाम है। पुलिस का कहना है कि वे हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच करेंगे ताकि दुर्घटना की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके।