- 2019 में कार्डियोलाजी, न्यूरोसर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलाजी और नेफ्रोलाजी डॉक्टरों की कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी मंजूरी
करनाल: ब्रेकिंग न्यूज : कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज शुरु हुए 13 साल बीत चुके है और 8 साल से मेडिकल कॉलेज नए भवन में चल रहा है। लेकिन अभी तक मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आए हैं। मेडिकल कॉलेज को मई 2019 में चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की मंजूरी मिली थी। जिसमें कार्डियोलाजी, न्यूरोसर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलाजी और नेफ्रोलाजी शामिल है लेकिन इनमें से अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया है। कई महीनों तक न्यूरोसर्जरी डॉक्टर ने ड्यूटी दी थी लेकिन वह भी छोड़कर चले गए थे। अभी तक मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही हैं। सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के लिए मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में महंगा इलाज करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इमरजेंसी में मरीजों को दिल्ली, चंडीगढ़ दौड़ना पड़ रहा है और लाखों रुपए डॉक्टरों को देने पड़ रही है।
हर साल सैकड़ों लोगों दुर्घटना होने पर अक्सर व्यक्ति के सिर पर चोट लगती है , मरीजों को चंडीगढ़ व रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है
न्यूरोलाजिस्ट और कार्डियोलाजी न होने से हर साल सैकड़ों लोगों की जान भी जा रही है क्योंकि दुर्घटना होने पर अक्सर व्यक्ति के सिर पर चोट लगती है और फिर उसे चंडीगढ़ व रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। कई बार मरीज बीच रास्ते में ही दमतोड़ देता है। यही हाल हार्ट अटैक का है। हार्ट अटैक से सबसे अधिक मरीजों की जान जा रही है। मेडिकल कॉलेज में फिलहाल 1200 के करीब मरीज ओपीडी में आ रहे हैं और 200 के करीब मरीज अस्पताल में दाखिल भी रहते हैं। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज में पानीपत, कैथल, कुरूक्षेत्र, यमुनानगर के मरीज आते हैं और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस कारण सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर न होने के कारण मेडिकल कॉलेज रेफर सेंटर ही बनकर रह गया है।
ये चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर जिनकी मरीजों को काफी जरुरत
1. न्यूरोलाजी डॉक्टर :- न्यूरोलाजी डॉक्टर के आने से कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज में मरीजों को मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों से संबंधित विकारों का उपचार करते हैं। इससे अलग स्ट्रोक, मिर्गी , पार्किंसंस, अल्जाइमर (भूलने की बीमारी), माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर, संक्रमण (मेनिन्जाइटिस), मांसपेशियों की कमजोरी (मायस्थेनिया ग्रेविस), और नसों में झुनझुनी/दर्द जैसे रोगियों का भी उपचार करतें है।
2. कार्डियोलाजी : – कॉर्डियोलाजी डॉक्टर के आने से ह्दय संबंधित मरीजों को उपचार मिलेगा। जिसमें हार्ट अटेक व जिन मरीजों के हार्ट में वाल डली हुई है उसका भी इलाज किया जाएगा।
3. गैस्ट्रोएंटरोलाजी :- गैस्ट्रोएंटरोलाजी के डॉक्टर के आने से मरीजों को पाचन तंत्र (पेट, आंतें, लिवर, पित्ताशय, अग्न्याशय) के रोगों के निदान और उपचार मिजेगा। ये डाक्टर पेट दर्द, एसिड रिफ्लक्स , अल्सर, आइबीएस, और जिगर की बीमारियों का इलाज करते हैं।
4. नेफ्रोलाजी :- नेफ्रोलाजी के डाक्टर के आने से गुर्दे के कार्यों, रोगों की रोकथाम और उनके उपचार से इलाज मिलेगा। किडनी और उससे जुड़ी बीमारियां जैसे क्रोनिक किडनी रोग , किडनी फेलियर, हाई ब्लड प्रेशर और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का निदान और प्रबंधन भी करेंगे। डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण भी किया जा सकेगा।
2012 से शुरु हुआ था मेडिकल कॉलेज
2012 में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ था लेकिन उस समय जिला नागरिक अस्पताल के भवन में ही मेडिकल कालेज चल रहा है। इसके बाद 642 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग बनाई गई। मार्च 2017 में मेडिकल कॉलेज को सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग से नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया। तभी से लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें इलाज के लिए चंडीगढ़ व रोहतक नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन फिर भी मेडिकल कालेज में मरीजों को रेफर किया जा रहा था।
वर्जन
मेडिकल कालेज में चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पोस्ट है। अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया है। कुछ महीने के लिए न्यूरोलाजी डॉक्टर ने भी ड्यूटी दी है। इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया हुआ है।
डा. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज करनाल।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया था। सरकार इस पर काम कर रही है। जल्द ही डाक्टरों की कमी दूर कर दी जाएगी। सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के बारे में भी बातचीत की जाएगी।
जगमोहन आनंद, विधायक, करनाल।