March 7, 2026
7 March 7

आज के मिलावटखोरी के दौर में जहां शुद्ध दूध और घी मिलना दूभर हो गया है, वहीं हरियाणा के करनाल जिले के गांव मंगलोरा की ग्रामीण महिलाओं ने एक अनूठी पहल की है। ‘द हरियाणा अतुल्य नारी शक्ति’ संस्थान से जुड़ी लगभग 500 महिलाओं का यह समूह अपनी मेहनत और हुनर के दम पर सदियों पुरानी पारंपरिक बिलौना पद्धति को पुनर्जीवित कर रहा है। ये महिलाएं न केवल शुद्ध डेयरी उत्पाद तैयार कर रही हैं, बल्कि उन्होंने इसे एक सफल व्यवसाय मॉडल में तब्दील कर दिया है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

इस समूह की कार्यप्रणाली बेहद दिलचस्प और पारंपरिक है। समूह की सदस्य कौशल ने बताया कि उनकी दिनचर्या सुबह 4:30 बजे ही शुरू हो जाती है। सबसे पहले दूध को मिट्टी के बर्तनों में धीमी आंच पर घंटों कढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया में दूध का रंग धीरे-धीरे लाल होने लगता है, जिससे तैयार होने वाली लस्सी को एक विशेष स्वाद और ‘लाल लस्सी’ का नाम मिलता है। शहरों में मिलने वाली साधारण लस्सी के मुकाबले, यह लस्सी शुद्धता और स्वाद के मामले में कहीं अधिक समृद्ध है। कढ़ाए गए दूध को ठंडा करके जमाया जाता है और फिर सुबह सभी महिलाएं मिलकर पारंपरिक लकड़ी के बिलौने से उसे बिलोती हैं।

बिलौना पद्धति से तैयार किए गए उत्पादों की फेहरिस्त में केवल लस्सी ही नहीं, बल्कि शुद्ध सफेद मक्खन और देसी घी भी शामिल है। महिलाओं का कहना है कि वे मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग करती हैं, जिससे उत्पादों की तासीर ठंडी बनी रहती है और उनका प्राकृतिक स्वाद बरकरार रहता है। इसके अलावा, दूध को कढ़ाने के बाद जो ठोस पदार्थ बचता है, उससे बिना किसी मिलावट की शुद्ध मावे (खोया) की बर्फी तैयार की जाती है। इस बर्फी की खुशबू और शुद्धता इतनी प्रभावशाली है कि लोग हलवाइयों की मिलावट वाली मिठाइयों को छोड़ इन ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

इन महिलाओं की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब इनके पास ऑनलाइन ऑर्डर भी आने लगे हैं। मंगलोरा गांव में इनका अपना यूनिट और ऑफिस है, जहां से ये पूरे करनाल और आसपास के इलाकों में अपने उत्पादों की आपूर्ति करती हैं। हाल ही में करनाल के एनडीआरआई (NDRI) में आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले में इस समूह ने अपना स्टॉल लगाया, जहां भारी संख्या में लोग उनकी लाल लस्सी और सफेद मक्खन का जायका लेने पहुंचे। मेले में आए लोगों ने न केवल इन उत्पादों की सराहना की, बल्कि महिलाओं के इस सामूहिक प्रयास को महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।

समूह की महिलाओं का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को मिलावट मुक्त और पौष्टिक आहार प्रदान करना है। उनका मानना है कि यदि खान-पान शुद्ध होगा, तो समाज स्वस्थ और मजबूत बनेगा। वे कहती हैं कि महिलाएं यदि ठान लें तो वे खेती और किसानी के साथ-साथ किसी भी व्यवसाय में पुरुषों से आगे निकल सकती हैं। ‘एसएचजी’ (SHG) से जुड़ने के बाद मिले प्रोत्साहन ने उन्हें केवल घरेलू काम तक सीमित न रहकर एक उद्यमी बनने की प्रेरणा दी। आज ये महिलाएं न केवल अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि आधुनिक बाजार में शुद्धता की नई परिभाषा भी गढ़ रही हैं।

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