होली का पावन पर्व करनाल शहर में इस बार एक नई और खूबसूरत परिभाषा लिखता हुआ नजर आया। रंगों के इस त्यौहार को लेकर जहाँ हमेशा हुड़दंग और शोर-शराबे की आशंका बनी रहती है, वहीं इस बार करनालवासियों ने इसे बेहद सभ्य, सुरक्षित और पारिवारिक अंदाज में मनाकर एक मिसाल पेश की है। शहर के नरसी विलेज सहित सेक्टर-13 और अन्य रिहायशी इलाकों में सुबह से ही उत्सव का माहौल बना रहा, जहाँ परिवारों ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर इस पर्व की खुशियाँ साझा कीं।
इस वर्ष की होली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि लोगों ने हुड़दंगबाजी और उपद्रव को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। गली-मोहल्लों और सेक्टरों में रहने वाले लोगों ने अपने परिवारों के साथ मिलकर जश्न मनाया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई भक्ति और प्रेम के रंगों में सराबोर नजर आया। नरसी विलेज में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों ने न केवल रंगों से होली खेली, बल्कि ढोल की थाप पर जमकर नृत्य भी किया। उत्सव के दौरान ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली’ जैसे सदाबहार गीतों पर लोग थिरकते नजर आए और पूरा वातावरण ‘हैप्पी होली’ के जयकारों से गूंज उठा।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का असर भी इस बार साफ़ तौर पर देखने को मिला। बातचीत के दौरान कई निवासियों ने बताया कि उन्होंने इस बार पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं की है। लोगों ने सूखे गुलाल और विशेष रूप से ऑर्गेनिक (प्राकृतिक) रंगों का चुनाव किया, ताकि किसी की त्वचा को नुकसान न पहुंचे और पर्यावरण का संरक्षण भी हो सके। कई युवाओं और बच्चों ने भी ‘सेफ होली’ (सुरक्षित होली) के संदेश को आगे बढ़ाया। उन्होंने ग्रीस या रसायनों वाले स्प्रे का उपयोग करने के बजाय शालीनता से गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाई दी।
मोहल्ले के निवासियों का कहना है कि उन्होंने ऐसा आनंद पहले कभी महसूस नहीं किया। इस बार सभी पड़ोसी एक बड़े परिवार की तरह एकजुट हुए, जिससे सामाजिक समरसता की भावना और भी मजबूत हुई है। महिलाओं और बच्चों के लिए यह अनुभव काफी सुखद रहा क्योंकि पुलिस की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों के सहयोग से हुड़दंगियों पर लगाम कसी गई थी, जिससे वे बिना किसी डर के खुलकर इस त्यौहार का लुत्फ उठा सके। कई नवविवाहित जोड़ों और बच्चों के लिए यह पहली होली थी, जिसे लेकर उनमें भारी उत्साह देखा गया।
एक स्थानीय निवासी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि रंगों में रंग मिल जाने का यह त्यौहार दिलों को जोड़ने वाला है। उन्होंने बताया कि इस बार की होली बेहद ‘डिसेंट’ यानी सभ्य रही, जहाँ प्यार के रंगों ने नफरत की हर दीवार को ढहा दिया। बच्चों ने भी पिचकारियों के साथ मस्ती की लेकिन मर्यादाओं का पूरा ध्यान रखा। शहर के सेक्टर-13 में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपनों के बीच पहुंचे।
अंततः, करनाल में इस बार की होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और जिम्मेदारी का संगम बनकर उभरी है। परिवारों द्वारा सामूहिक रूप से मनाए गए इस जश्न ने यह संदेश दिया है कि त्यौहारों का असली आनंद मर्यादाओं के भीतर और अपनों के साथ रहने में ही है। प्रशासन की सक्रियता और जनता की समझदारी ने इस उत्सव को यादगार बना दिया है।