March 26, 2026
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  • हर दूसरे घर में कैंसर से मौत, बोले- गांव में कोई शादी नहीं करना चाहता

करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : पंजाब में बठिंडा का एक गांव- जज्जल जहां गली है न, इसके हर घर में कोई न कोई कैंसर से मरा है। किसी को ब्लड कैंसर हुआ तो किसी मुंह का। किसी के फेफड़ों में कैंसर था तो किसी को आंतों का। यहां मौत माने कैंसर है। हालात ऐसे हैं कि यहां शादी से पहले लड़के और लड़की की कैंसर रिपोर्ट देखी जाती है। यहीं बीरपाल का घर है, जहां कैंसर से अपने लोगों को खो चुके।

अभी कुछ दिन पहले सास भी गुजर गईं

बीरपाल कौर  ने रजनी राणा की ओर इशारा करते हुए बताया कि इनके ससुर की भी कुछ साल पहले कैंसर से मौत हुई थी। अभी कुछ दिन पहले सास भी गुजर गईं। तेरहवीं बाकी है।इस पर रजनी कहती हैं, 7 साल पहले की बात है। मेरी नई-नई शादी हुई थी। कुछ महीने बाद ससुर को जीभ के नीचे छेद जैसा महसूस होने लगा। उन्हें शहर ले जाकर चेकअप कराया, तो पता चला कि चौथे स्टेज का मुंह का कैंसर था। डॉक्टर ने कहा- घर ले जाकर सेवा करो, अब इलाज का कोई फायदा नहीं। फिर भी सास बोलीं- चूल्हा-चौका करके भी पति का इलाज कराऊंगी। वह जमींदारों के यहां गोबर उठाने लगीं। वहां इतना काम करने लगीं कि सिर पर टोकरी उठाते-उठाते उनके बाल घिस गए, लेकिन ससुर  नहीं बचे।

दो साल ही जिंदा रहे, फिर उनकी मौत हो गई
दो साल ही जिंदा रहे, फिर उनकी मौत हो गई। धीरे-धीरे दुख के कारण सास भी कमजोर होने लगीं। अभी एक हफ्ते पहले उनकी भी मौत हो गई। 50-55 साल की उम्र क्या जाने होती है? अब किस्मत ही ऐसी है, तो क्या करें?’ बीरपाल के आंगन में एक पानी की टंकी रखी है। रजनी कहती हैं, ‘इसमें जो गंदा पानी दिख रहा है, वही हम लोग पीते हैं। जब ससुर को डॉक्टर के पास दिखाने ले गई थी, तो डॉक्टर ने कहा था- पानी की खराबी की वजह से मुंह का कैंसर हुआ था। क्या करें, मौत से डर लगता है, लेकिन फिर भी यही पानी पीते हैं।

सालभर के भीतर मां की मौत हो गई

दीवार पर उसकी मां रानी कौर की तस्वीर टंगी है। वह कहती है, ‘पापा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। हम दो बहनें और एक भाई हैं। दादी ने किसी तरह हमें पाल-पोसा। 10वीं के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी। बिना मां के बच्चों की क्या ही जिंदगी होती है। मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है। मां के पेट में अक्सर दर्द रहता था। एक दिन पापा उन्हें साइकिल से बठिंडा चेकअप कराने डॉक्टर के पास ले गए। टेस्ट हुआ, तो पता चला कि बच्चेदानी का कैंसर था। पापा ने पैसे के लिए दो कनाल जमीन बेच दी। हर हफ्ते पापा, मां के इलाज के लिए शहर जाने लगे, लेकिन सालभर के भीतर मां की मौत हो गई।

15 साल पहले मेरे पति की भी ब्लड कैंसर के कारण मौत हो गई

जेठानी बेड़वंती बताती हैं कि उनके 15 साल पहले पति की भी ब्लड कैंसर के कारण मौत हो गई थी। एक साल चंडीगढ़ और एक साल बीकानेर में उनका इलाज करवाती रही, लेकिन उन्हें नहीं बचा पाई। घर-द्वार, जमीन… सब बिक गया। अब बेटा है, वही काम-धंधा करके घर चला रहा है।’ एक स्थानीय साथी 30 किलोमीटर दूर चट्ठेवाला गांव के ऐसे ही हालात के बारे में बताता है। 10 घरों में से 6-7 में कैंसर से हुई मौतों के मामले मिल जाते हैं। यहीं एक घर में महिंदर सिंह पिछले एक साल से बिस्तर पर पड़े हैं। उन्हें मुंह का कैंसर है। पत्नी मंजीत कौर जमींदार के यहां चूल्हा-चौका करने गई हुई हैं।

बठिंडा में ही चार कैंसर अस्पताल हैं और एम्स में हर दिन 120 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं

एम्स बठिंडा में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. सपना भट्टी ने बताया कि इन गांवों की स्थिति गंभीर है, लेकिन अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बठिंडा में ही चार कैंसर अस्पताल हैं और एम्स में हर दिन 120 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। पहले यहां सुविधाएं नहीं थीं, तो लोग बीकानेर जाते थे। यहां से एक ट्रेन चलती थी, जिसे लोग ‘कैंसर एक्सप्रेस’ कहते थे। अब वही मरीज इलाज के लिए बठिंडा आ रहे हैं। यहां बढ़ते कैंसर का सबसे बड़ा कारण पानी है। पानी बेहद खराब है। जिस मिट्टी में उगा अनाज लोग खाते हैं, वह भी प्रभावित है। फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे मिट्टी और पानी दोनों जहरीले हो गए हैं।

पानी में आर्सेनिक, सेलेनियम और यूरेनियम जैसे तत्व खतरनाक स्तर पर पाए जा रहे है

पानी में आर्सेनिक, सेलेनियम और यूरेनियम जैसे तत्व खतरनाक स्तर पर पाए जा रहे हैं, जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, रिफाइनरी प्लांट से निकलने वाला जहरीला कचरा भी हालात को और बिगाड़ रहा है। यहां तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब का सेवन भी ज्यादा होता है, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। अगर किसी एक व्यक्ति को कैंसर होता है, तो परिवार के बाकी लोगों में भी खतरा बढ़ जाता है। गांवों में लोग शर्म और डर की वजह से कैंसर से हुई मौतों के बारे में खुलकर बात नहीं करते। उन्हें बदनामी का डर रहता है। हालांकि, हम लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में जाकर लोगों को इसके प्रति सचेत कर रहे हैं।

 

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