होली का पावन पर्व देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। रंगों के इस उत्सव में जहाँ हर कोई सराबोर नजर आ रहा है, वहीं हरियाणा के करनाल स्थित सेक्टर-9 के श्री कृष्ण कृपा धाम में एक अलग ही आध्यात्मिक छटा देखने को मिली। यहाँ प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सान्निध्य में भव्य फूलों वाली होली का आयोजन किया गया। इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और स्वामी जी के साथ भक्ति के रंगों में रंगे नजर आए।
उत्सव की शुरुआत आध्यात्मिक भजनों और कीर्तनों के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए होली के वास्तविक अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के प्रेम, विश्वास और सद्भावना को जागृत करने का पर्व है। स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि जिस प्रकार होलिका दहन के माध्यम से बुराई का अंत हुआ था, उसी प्रकार हमें अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष जैसी बुराइयों का दहन करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जब हमारे मन से दुर्भावना के रंग उतरेंगे, तभी सद्भावना और प्रेम के सच्चे रंग चढ़ पाएंगे। आज के इस भौतिकवादी युग में जहाँ वैज्ञानिक विस्तार तो बहुत हुआ है, लेकिन मानवीय चिंताएं, दुविधाएं और अशांति भी बढ़ी है। ऐसे में भारत की सनातन परंपराओं और इन पर्वों की सार्थकता और भी बढ़ जाती है। ये उत्सव हमें फिर से एक-दूसरे से जोड़ने और समाज में समरसता फैलाने का अवसर प्रदान करते हैं।
फूलों की होली के दौरान स्वामी जी ने स्वयं श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की, जिससे पूरा धाम खुशबू और उल्लास से महक उठा। भक्तजन भी स्वामी जी के चरणों में नतमस्तक होकर और उनके आशीर्वाद से अभिभूत नजर आए। इस दौरान भजन गायकों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से भक्तों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। विशेष रूप से ‘आज बिरज में होली रे रसिया’ जैसे पारंपरिक गीतों ने उत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने विशेष रूप से युवाओं को अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में बढ़ता क्रोध और नशे की प्रवृत्ति एक गंभीर चिंता का विषय है। छोटी-छोटी बातों पर उत्तेजित हो जाना और नशे के जाल में फंसना न तो स्वयं उनके भविष्य के लिए अच्छा है और न ही राष्ट्र के लिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे क्रोध के रंगों को त्याग कर धैर्य और शांति का मार्ग अपनाएं। स्वामी जी ने सलाह दी कि यदि नशा करना ही है, तो राष्ट्रभक्ति, समाज सेवा और प्रेम का नशा करें।
उत्सव के अंत में स्वामी जी ने सभी देशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्व शांति और सबके कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने कामना की कि यह होली हर घर में खुशियां, हर मन में प्रेम और पूरे समाज में भाईचारे का संदेश लेकर आए। कृष्ण कृपा धाम में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ें आज भी हमें एकता के सूत्र में पिरोने की शक्ति रखती हैं।