March 3, 2026
2 March 13

करनाल जिले की एक बेटी ने देश की सबसे कठिनतम परीक्षाओं में से एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) फाइनल के परिणामों में पूरे भारत में प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया है। दीक्षा गोयल ने सीए फाइनल परीक्षा में 600 में से 486 अंक (81%) प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल की है। यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि दीक्षा ने इससे पहले सीए इंटरमीडिएट परीक्षा में भी पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा करनाल शहर और उनका स्कूल ओपीएस विद्या मंदिर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

दीक्षा गोयल की इस गौरवमयी उपलब्धि के बाद, उन्होंने अपने उस स्कूल का रुख किया जहां से उनकी शिक्षा की नींव पड़ी थी। करनाल के ओपीएस विद्या मंदिर स्कूल में दीक्षा के पहुंचते ही जश्न का माहौल पैदा हो गया। स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और उन शिक्षकों ने जिन्होंने दीक्षा को पहली कक्षा से बारहवीं तक पढ़ाया था, उन्होंने अपनी इस होनहार छात्रा का स्वागत ढोल-नगाड़ों और नाच-गाकर किया। स्कूल की मैनेजमेंट और शिक्षकों के चेहरों पर अपनी छात्रा की इस बड़ी कामयाबी को लेकर एक अलग ही संतोष और गर्व का भाव देखा गया।

अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष और रणनीति को साझा करते हुए दीक्षा ने बताया कि सीए फाइनल की तैयारी के लिए उन्होंने पिछले छह महीनों तक प्रतिदिन 10 से 11 घंटे की कड़ी मेहनत की। उन्होंने युवाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश दिया कि कभी भी किसी कार्य को करने के लिए ‘बैकअप प्लान’ (विकल्प) मत रखिए। दीक्षा के अनुसार, यदि आपके दिमाग में पहले से यह बात है कि सफल न होने पर क्या करेंगे, तो आपकी एकाग्रता कम हो जाती है। उन्होंने पूरी लगन और विश्वास के साथ केवल सीए बनने के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। दिलचस्प बात यह है कि आईसीएआई (ICAI) के इतिहास के सबसे कठिन माने जाने वाले इस अटेम्प्ट में दीक्षा ने दूसरे रैंक धारक से 35 अंकों की बड़ी बढ़त हासिल की है।

दीक्षा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, स्कूल के शिक्षकों और अपनी कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि स्कूलिंग के दौरान उन्होंने कभी ट्यूशन नहीं ली और हमेशा अपने शिक्षकों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा। स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि दीक्षा पहली कक्षा से ही स्कूल की हर गतिविधि, चाहे वह डिबेट हो या क्विज़ कंपटीशन, हमेशा अव्वल रहती थी। उन्होंने बताया कि दीक्षा की नींव इतनी मजबूत थी कि उन्होंने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में भी श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।

सोशल मीडिया के युग में युवाओं के भटकने के सवाल पर दीक्षा ने बहुत ही संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया बुरा नहीं है बशर्ते आपका अपने आप पर नियंत्रण हो। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान इंस्टाग्राम (Instagram) जैसे प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह नहीं छोड़ा, बल्कि पढ़ाई के बीच 10-15 मिनट के एनर्जी ब्रेक के रूप में इसका इस्तेमाल किया। उनका मानना है कि यदि आप स्वयं पर नियंत्रण रखते हुए समय का प्रबंधन कर सकते हैं, तो कोई भी चीज़ आपकी सफलता में बाधा नहीं बन सकती।

दीक्षा के माता-पिता, रेखा गोयल और सुरेंद्र गोयल ने अपनी बेटी की इस अचीवमेंट पर अपार खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि दीक्षा बचपन से ही बहुत समझदार और मेहनती रही है। उनके पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी ने पूरे शहर में उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। स्कूल के डायरेक्टर ने भी पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि दीक्षा को 10वीं कक्षा में टॉप करने पर तत्कालीन चेयरमैन स्वर्गीय अविनाश बंसल जी के हाथों लैपटॉप मिला था और आज वह सफलता के उस शिखर पर पहुंच गई है जिसकी कल्पना हर विद्यार्थी करता है। यह सफलता करनाल के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखी जा रही है।

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