करनाल की सड़कें आज एक बार फिर कर्मचारियों के नारों से गूँज उठीं। ‘राष्ट्रीय मांग दिवस’ के अवसर पर सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में विभिन्न विभागों के कर्मचारी एकत्रित हुए और अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारी पहले बिजली दफ्तर पर इकट्ठा हुए और वहां से एक विशाल जुलूस की शक्ल में पैदल मार्च करते हुए करनाल के जिला सचिवालय (डीसी ऑफिस) पहुँचे।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार लगातार मजदूर और कर्मचारी विरोधी फैसले ले रही है। सर्व कर्मचारी संघ के नेताओं ने बताया कि हाल ही में शिरडी, महाराष्ट्र में हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी फेडरेशन के राष्ट्रीय सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि 26 फरवरी को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय मांग दिवस’ मनाया जाएगा। इसी कड़ी में आज करनाल का जिला सचिवालय कर्मचारियों के गुस्से का गवाह बना।
आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की है। कर्मचारी नेताओं ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने सरकार को 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए 28 फरवरी तक की डेडलाइन दी थी। लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के बजाय कर्मचारियों को ‘हरियाणा कौशल रोजगार निगम’ के तहत लाने की साजिश रच रही है, जिसे कर्मचारी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।
इसके अलावा, कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम – OPS) को बहाल करने की भी पुरजोर मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए चार नए लेबर कोड लेकर आई है, जो मजदूरों के शोषण का माध्यम बनेंगे। नई शिक्षा नीति और बिजली बिलों में संशोधन को भी जनविरोधी बताते हुए इन्हें तुरंत रद्द करने की मांग की गई है।
सीआईटीयू (CITU) जिला प्रधान दिनेश राणा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कर्मचारियों के पक्ष में आए फैसलों को लागू नहीं कर रही है। उन्होंने पानीपत रिफाइनरी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों से 8 घंटे के बजाय 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन यहीं थमने वाला नहीं है। आगामी 8 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर तमाम महिला कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगी और अपनी आवाज बुलंद करेंगी। इसके पश्चात 24 मार्च को दिल्ली में एक विशाल प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।
जिला सचिवालय पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कर्मचारियों ने उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से सरकार को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी जायज मांगों पर गौर नहीं किया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा। कर्मचारियों के इस प्रदर्शन ने शहर की यातायात व्यवस्था को भी कुछ समय के लिए प्रभावित किया, लेकिन कर्मचारियों का जोश कम नहीं हुआ। अब देखना यह होगा कि 28 फरवरी की डेडलाइन और आगामी आंदोलनों की चेतावनी पर सरकार का क्या रुख रहता है।