करनाल में सरकारी कार्यप्रणाली की एक बेहद चिंताजनक और लापरवाह तस्वीर सामने आई है। शहर के मध्य स्थित पटवारखाने में पिछले दो दिनों से बिजली गुल है, जिसके चलते यहाँ आने वाले सैकड़ों लोगों का काम अधर में लटका हुआ है। बिजली न होने के कारण कंप्यूटर और ऑनलाइन सिस्टम पूरी तरह से बंद पड़े हैं, जिससे इंतकाल और दस्तावेजों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
पटवारखाने की स्थिति इस कदर खराब है कि यहाँ सुबह 9:00 बजे से ही लोग जुटना शुरू हो जाते हैं, लेकिन ड्यूटी का समय शुरू होने के बावजूद कई कमरों पर ताले लटके मिलते हैं। बिजली न होने का बहाना बनाकर कर्मचारी काम करने से पल्ला झाड़ रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जो जींद, मक्कू माजरा और अन्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से भारी किराया खर्च कर और अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर यहाँ पहुँच रहे हैं।
जींद से आए एक पीड़ित ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह लगातार दूसरे दिन यहाँ आ रहा है, लेकिन बिजली न होने और पटवारी के न मिलने के कारण उसका इंतकाल का काम नहीं हो सका। उन्होंने प्रशासन और सरकार से सवाल किया कि आखिर टैक्स देने वाली जनता को इस तरह की प्रताड़ना क्यों झेलनी पड़ रही है? इसी तरह करनाल के ही आर.के. पुरम से आए एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से चक्कर काट रहा है, लेकिन यहाँ अधिकारियों की कार्यशैली इतनी ढीली है कि छोटे से काम के लिए भी महीनों का समय लग जाता है।
हैरानी की बात यह है कि सुबह 10:30 बजे तक भी पटवारखाने के कई कैबिन खाली नज़र आए और कुर्सियों पर अधिकारी मौजूद नहीं थे। यहाँ तक कि कुछ दफ्तरों के बाहर ताले भी नहीं खुले थे। बिजली न होने का कारण बिल का भुगतान न होना है या कोई तकनीकी खराबी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सरकारी दफ्तर में इस तरह का अंधेरा प्रशासन की गंभीरता पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
एक अनुमान के अनुसार, प्रतिदिन सुबह-सुबह लगभग 50 से अधिक लोग यहाँ काम के लिए पहुँचते हैं, लेकिन व्यवस्था की बदहाली देखकर मायूस होकर वापस लौट जाते हैं। निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग अपनी दिहाड़ी और छुट्टी खराब करके आते हैं, फिर भी उन्हें यहाँ केवल टालमटोल और बंद दफ्तरों का सामना करना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि अगर बिजली होती भी है, तब भी अधिकारी समय पर अपनी सीटों पर नहीं मिलते और काम को बेवजह लंबा खींचा जाता है।
यह पहली बार नहीं है जब करनाल के पटवारखाने से इस तरह की शिकायतें मिली हैं। बिजली कटने और अधिकारियों की अनुपस्थिति यहाँ एक स्थायी समस्या बनती जा रही है। जिला प्रशासन और उपायुक्त (डी.सी.) के संज्ञान में मामला आने के बावजूद धरातल पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है। आम जनता ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कम से कम ड्यूटी समय के दौरान वे अपनी सीटों पर मौजूद रहें ताकि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें।