करनाल: हरियाणा के करनाल जिले का प्रमुख खेल परिसर, कर्ण स्टेडियम, प्रशासन की अनदेखी और खराब रखरखाव के कारण बदहाली के आंसू रो रहा है। हैरानी की बात यह है कि खेल विभाग द्वारा किए गए हालिया सर्वे में इस स्टेडियम को ‘ए-ग्रेड’ रैंकिंग दी गई है, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार बुनियादी ढांचा अब धीरे-धीरे बिखरने लगा है, जिससे यहाँ अभ्यास करने वाले हजारों खिलाड़ियों का भविष्य और सुरक्षा दांव पर है।
स्टेडियम का मुख्य आकर्षण, सिंथेटिक ट्रैक, जो एथलीटों के अभ्यास के लिए बनाया गया था, अब कई स्थानों से उखड़ चुका है। ट्रैक के बीच-बीच में गहरे पैच बन गए हैं और इसके पीसेस (टुकड़े) बाहर निकल रहे हैं। जल निकासी के लिए बनाए गए छिद्र (होल्स) पूरी तरह से मिट्टी और गंदगी से भरे पड़े हैं, जिसके कारण हल्की बारिश में भी ट्रैक पर पानी जमा हो जाता है और ‘बबलिंग’ होने लगती है। ट्रैक के चारों ओर उगी लंबी घास और गंदगी इसकी साफ-सफाई की पोल खोल रही है।
सिंथेटिक ट्रैक के साथ-साथ वॉलीबॉल कोर्ट की हालत भी अत्यंत दयनीय है। पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित इस कोर्ट की पिछले डेढ़ साल से मरम्मत नहीं हुई है। कोर्ट की ऊपरी सतह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे खिलाड़ियों के फिसलने और चोटिल होने का गंभीर खतरा बना रहता है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब वे पसीना बहाकर मेहनत करते हैं, तब उन्हें उचित सुविधाएं नहीं मिलतीं, लेकिन मेडल जीतने पर सरकारें वाहवाही लूटने में पीछे नहीं रहतीं।
इस संबंध में जिला खेल अधिकारी राजीव जी से बातचीत की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि वॉलीबॉल कोर्ट की स्थिति खराब है और इसके नवीनीकरण के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। सिंथेटिक ट्रैक की सफाई के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि स्टेडियम में सफाई कर्मचारियों की कमी है, लेकिन जल्द ही अन्य केंद्रों से स्टाफ बुलाकर विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि ट्रैक के टूटे हुए पैचेस को भी जल्द ठीक कराया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पैच लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा और पूरे ट्रैक को दोबारा बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इन बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करता है ताकि खिलाड़ी सुरक्षित वातावरण में अभ्यास कर सकें।