- अब तहसील में टोकन की जरूरत नहीं, पोर्टल पर आवेदन पर जारी यूनिक नंबर से होगी रजिस्ट्री
तहसीलों में शुरू हुई पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है। अब रजिस्ट्री के लिए पोर्टल से अलग से टोकन नंबर नहीं लेना पड़ेगा। आवेदन के समय जो यूनिक या आवेदन फाइल नंबर जारी होगा, वही टोकन नंबर की तरह काम करेगा। रजिस्ट्री में फोटो आदि कराने के लिए अलग से टोकन नंबर नहीं लेना पड़ेगा। पारदर्शिता और प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राजस्व विभाग की ओर से रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर को अपडेट किया है।
नवंबर माह में पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया के लागू होने के बाद टोकन नंबर न जारी होना सबसे बड़ी परेशानी बना था, इस पर एनआईसी सहित अन्य टीमों ने समाधान का प्रयास किया, इसके बाद भी व्यवस्था पूरी तरह से सुगम नहीं हो पाई तो अब सॉफ्टवेयर के यूनिक नंबर के अनुसार ही रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया गया है। खास बात यह भी है कि इस प्रक्रिया के तहत सात दिनों में रजिस्ट्री हो जाएगी। इसमें आवेदन फार्म भरने से लेकर तहसीलदार कार्यालय की ओर से होने वाली दस्तावेजों की जांच से लेकर फोटो कराने तक की पूरी प्रक्रिया इसी अवधि में होगी।
नए सिस्टम से कर्मचारियों की मनमानी पर रोक लगेगी और आम लोगों को तय समय में सेवा मिल सकेगी। तहसील प्रशासन के अनुसार, जैसे ही कोई उपभोक्ता ऑनलाइन रजिस्ट्री के लिए आवेदन करेगा, सॉफ्टवेयर अपने आप एक यूनिक टोकन नंबर जनरेट करेगा। इसके बाद संबंधित कर्मचारी उसी क्रम में दस्तावेजों की जांच करेगा। शुरुआत में पूरे प्रदेश में महज रोजाना 100 से 150 रजिस्ट्री हो पा रही थी, अब यह संख्या तीन हजार तक पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सॉफ्टवेयर को और बेहतर किया जाएगा।
फाइल रुकी तो कर्मचारियों को देना पड़ेगा जवाब
नई व्यवस्था में हर आवेदक की फाइल नंबर के हिसाब से आगे बढ़ेगी, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष रहेगी। इसके साथ ही प्रशासन ने समय सीमा भी तय कर दी है। ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित कर्मचारी को सात दिन में रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। तय समय में रिपोर्ट नहीं देने पर सिस्टम में जानकारी दर्ज हो जाएगी। इससे जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। यानी उन्हें फाइल के अटकने का वाजिब कारण बताना होगा या फिर आवेदक से संपर्क करके आपत्ति को दूर कराना होगा।
एक-एक जिले से फंसा था 30 करोड़ का राजस्व
पहली से लेकर 30 नवंबर तक पेपरलेस व्यवस्था में लोगों के कागजी प्रक्रिया में उलझने के कारण पुरानी व्यवस्था के मुकाबले महज एक प्रतिशत ही रजिस्ट्री हो पाई। ऐसे में जनता को तो परेशानी झेलनी पड़ी, वहीं सरकार का भी इन दिनों में प्रत्येक जिले से 30 से 60 करोड़ रुपये तक का राजस्व अटका। क्योंकि नए पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों के कारण टोकन भी नहीं कट पाए। इसके अलावा अन्य कई खामियां अलग थी, जिनका समाधान विभाग की ओर से पोर्टल को अपडेट करके किया गया।
ऑब्जेक्शन पर ये किया समाधान
– रजिस्ट्री आवेदन करते समय प्रक्रिया बीच में ही छूटने से फाइल रिजेक्ट होती थी, अब पोर्टल अपडेट है।
– ऑनलाइन पंजीकरण के बाद उपभोक्ता अपाइंटमेंट स्लॉट बुक करने में भी देरी कर रहे थे, अब अलग से टोकन नहीं लेना पड़ेगा।
– लोग जब फाइल को ऑनलाइन सबमिट करते हैं, तो अधूरे दस्तावेज पाए जा रहे थे। दस्तावेजों को पूरा करना ही होगा।
– अधिकतर ऑब्जेक्शन में आधार कार्ड व नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी नहीं मिल रही थी, अब पोर्टल अपडेट किया है।
तकनीकी दिक्कतें हुईं दूर : डीआरओ
पहले व्यवस्था थी कि लोग टोकन लेकर आ जाते थे। अब पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया में बदलाव किया है। सभी दस्तावेज और जानकारी पोर्टल पर शुरुआत में ही दर्ज करने होंगे। तहसीलदार कार्यालय की ओर से इनकी जांच होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को निर्धारित तिथि में आकर फोटो खिंचवाना होगा, अलग से टोकन नहीं लेना पड़ेगा। पोर्टल की शुरुआती दिक्कतें दूर हो गई हैं। रजिस्ट्री की संख्या भी बढ़ी है।
– मनीष यादव, जिला राजस्व अधिकारी