इनेलो सुप्रीमो ने त्रिवेणी लगाकर दिया पर्यावरण सरंक्षण का संदेश

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इनेलो सुप्रीमो ओप्रकाश चौटाला ने आज समाधानांचल सेवा समिति द्वारा चलाए जा रहे त्रिवेणी लगाने के पुण्य कार्य को आगे बढ़ाते हुए आज 174वीं त्रिवेणी लगवाकर विस्तार से त्रिवेणी के बारे में बताया। श्री चौटाला ने बताया कि त्रिवेणी (बड़, नीम और पीपल) का शास्त्रों में भी विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपने जीवन में कम से कम एक त्रिवेणी अवश्य लगानी चाहिए।

जैसे-जैसे त्रिवेणी बढ़ती है वैसे ही आपकी सुख-स्मृद्धि भी बढ़ेगी और आपके सभी कष्ट स्वत: मिट जाएंगे। उन्होंने कहा कि हर इंसान के थोड़े-थोड़े योगदान से एक बड़ी चीज का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि रातों-रात कुछ नहीं बदलता और न ही बदला जा सकता है। एक बीज बोते हैं तो उसे बढऩे में समय तो लगता ही है। दूसरों की भलाई के लिए जो सांसे हमने जी हैं वही असल में जिंदगी है।

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राष्ट्रीय महासचिव बृज शर्मा ने कहा कि हमें अपने कीमती समय में से थोड़ा सा समय निकालकर सामाजिक कार्यों में लगाना चाहिए। त्रिवेणी लगवाकर उन्होंने कहा कि त्रिवेणी पर्यावरण के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रतिबद्धता का चिंतन करने का संदेश देती है। यदि वृक्षों का संरक्षण और नये पौधों का रोपण नहीं किया गया तो हमारी आने वाली पीढिय़ा शुद्ध वायु के लिए तरस जाएंगी।

समाधानांचल की राष्ट्रीय अध्यक्षा एडवोकेट संतोष यादव ने बताया कि ये त्रिवेणी एक साधारण वृक्ष न होकर इसका अध्यात्मिक महत्व है। त्रिवेणी को शास्त्रों में स्थाई यज्ञ की संज्ञा दी गई है। जहां त्रिवेणी लगी होती है वहां हर पल हर क्षण सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह चलता रहता है। हर वह सांस जो श्रद्धाभाव से अध्यात्मिक भाव से इस त्रिवेणी को लगाता है या लगवाता है या फिर इसका पालन पोषण करता है उसका कोई भी सात्विक कर्म विफल नहीं जाता।

उन्होंने कहा कि त्रिवेणी में सभी देवी-देवताओं एवं पितरों का वास माना जाता है। त्रिवेणी हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देती है और आने वाली भावी पीढ़ी के लिए भी वरदान साबित होती है। दूसरी ओर ये तो पर्यावरण की लड़ाई है और न्याय की लड़ाई है इसे हम मानते हैं कि वन, जलवायु और पर्यावरण सभी के सांझे सरोकार है और मेरे विचारों से इन सांझे सरोकारों का निबाह करने के लिए ही हमने त्रिवेणी लगाने की मुहिम छेड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि ये ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी।

इसलिए पर्यावरण के प्रति हमें कटिबद्ध हो जाना चाहिए। यदि वृक्षों का संरक्षण और नये पौधों का रोपण नहीं किया गया तो हमारी आने वाली पीढिय़ा शुद्ध वायु के लिए तरस जाएंगी और पूरी मानवता पर संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत हो जाना चाहिए।

इस मौके पर गुरताज विर्क, डा. राजेश, अमन शर्मा, गुलजार मान, धर्मबीर खरकाली, गुलाब बसई, रणबीर जयसिंहपुरा, विक्रम बैनीवाल, डा. प्रदीप कौशिक आदि उपस्थित रहे।


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