April 11, 2026
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  • ननिहाल पहुंचने पर स्वागत
  • मां को कहा था-एक दिन दुनिया को नाज होगा

करनाल : ब्रेकिंग न्यूज : सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, बस उसे पाने के लिए अडिग लक्ष्य और कड़ी मेहनत की दरकार होती है। करनाल जिले के गांव डीपो जनेसरो के एक बेहद साधारण परिवार के बेटे अजीत सैनी ने इसे साबित कर दिखाया है। नासा में चयन के बाद पहली बार अपने ननिहाल पानीपत के गांव उग्राखेड़ी पहुंचने पर अजीत का ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।

अजीत की सफलता के पीछे संघर्ष की एक ऐसी कहानी है जो किसी की भी आंखों में आंसू ला दे। अजीत की मां छन्नो देवी ने भावुक होते हुए बताया कि जब अजीत छठी कक्षा में थे, तब एक बार स्कूल वालों ने उनका बैग उठाकर क्लास से बाहर फेंक दिया था। उस अपमान से आहत होकर अजीत रोते हुए घर पहुंचा। तभी उसने वादा किया- मां, एक दिन ऐसा काम करके दिखाऊंगा कि पूरी दुनिया को मुझ पर नाज होगा। आज अजीत ने वह वादा निभा दिया है।

माता-पिता ने मजदूरी कर पढ़ाया

अजीत का जन्म एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता रामपाल और मां छन्नो देवी ने दिन-रात मेहनत-मजदूरी करके अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया। पिता रामपाल ने गर्व से कहा कि उनके बेटे ने बचपन में जो बड़े सपने देखे थे, आज उन्हें अपनी मेहनत के बल पर हकीकत में बदल दिया है।

बोले- चंद्रयान मिशन ने जगाई इच्छा

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए अजीत सैनी ने बताया कि उनके मन में नासा जाने का ख्याल तब आया जब भारतीय स्पेस एजेंसी (ISRO) का चंद्रयान मिशन पहली बार में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था। उस वक्त उनके मन में इच्छा जागी कि वह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कुछ ऐसा करें जिससे अपने देश की तकनीकी मदद कर सकें और इसी जिद ने उन्हें नासा तक पहुंचा दिया।

ननिहाल में बच्चों को दिया सफलता का मंत्र

नासा में चयन के बाद अजीत जब उग्राखेड़ी (पानीपत) पहुंचे, तो वह सबसे पहले अपने नाना के घर जाने के बजाय गांव के सरकारी स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ वक्त बिताया और उन्हें प्रेरित किया। अजीत ने बच्चों से कहा- गरीबी कभी भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती, बशर्ते आपके पास जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य और उसे पाने का जुनून हो। गांव के गणमान्य लोगों और स्कूल स्टाफ ने अजीत और उनके माता-पिता को सम्मानित किया।

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