हरियाणा के करनाल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक गरीब ई-रिक्शा चालक ने कूरियर कंपनी की प्रताड़ना और भारी भरकम जुर्माने के दबाव में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान सुरेश के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। इस घटना के बाद से मृतक के परिजनों में भारी रोष है और उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शव उठाने से मना कर दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी स्वयं मौके पर पहुंचीं और परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
पूरी घटना की जड़ एक गुम हुए कूरियर से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि सुरेश ई-रिक्शा चलाने के साथ-साथ एक निजी कंपनी के कूरियर पहुंचाने का काम भी करता था। कुछ समय पहले वह घरौंडा में कूरियर डिलीवरी के लिए गया था, जहाँ रिक्शा से एक कूरियर पैकेट गुम हो गया। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद कंपनी के सुपरवाइजर और अन्य कर्मचारियों ने सुरेश पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन पर आरोप है कि वे कूरियर को अत्यधिक कीमती बताकर सुरेश से लाखों रुपये की मांग कर रहे थे। सुसाइड नोट में भी प्रताड़ना और करीब 15 लाख रुपये मांगे जाने का जिक्र सामने आया है।
मृतक के परिजनों ने बताया कि सुरेश इस बात से काफी परेशान था कि इतना बड़ा जुर्माना वह कैसे भरेगा। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि जिस कूरियर के गुम होने की बात कही जा रही थी, वह कथित तौर पर बाद में मिल गया था। इसके बावजूद कंपनी के कर्मचारी सुरेश और उसकी बेटी को फोन करके लगातार पैसों के लिए धमका रहे थे। परिजनों के पास इस प्रताड़ना की कई ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद हैं, जिनमें उन्हें डराया-धमकाया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक शोषण ने सुरेश को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया।
घटना के बाद डीएसपी ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को शांत कराया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। डीएसपी ने आश्वासन दिया कि कंपनी के रोल की भी गहनता से जांच की जा रही है। सुपरवाइजर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उनके कॉल रिकॉर्ड व इनवॉइस की जांच की जाएगी। यदि कंपनी की संलिप्तता या गैर-जरूरी दबाव पाया जाता है, तो कंपनी के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों की मांग थी कि जब तक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होता और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। डीएसपी ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए परिजनों से सहयोग की अपील की और कहा कि शव की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ है और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच के लिए लैब भेज दिया है और मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग्स को सबूत के तौर पर कब्जे में लिया है। इस घटना ने एक बार फिर निजी कंपनियों के अपने कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के प्रति व्यवहार और उन पर बनाए जाने वाले अनैतिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।