करनाल में विकास कार्य अब जनता के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। शहर के हृदय स्थल घंटाघर चौक और रेलवे रोड क्षेत्र में निर्माणाधीन सिंगल पिलर फ्लाईओवर के प्रोजेक्ट ने स्थानीय दुकानदारों और आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इस कदर बदतर हो चुकी है कि दुकानदार अब खुलेआम प्रशासन और सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं। ताजा विवाद तब और गहरा गया जब निर्माण कार्य में जुटे ठेकेदारों ने गड्ढों में जमा सीवरेज का बदबूदार पानी नगर निगम की पार्किंग में छोड़ दिया, जिससे वहां खड़े वाहनों तक पहुंचना भी दूभर हो गया।
घंटाघर चौक पर दशकों से दुकान चला रहे व्यापारियों का कहना है कि पिछले ढाई-तीन महीनों से यहां गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। इन गड्ढों में सीवरेज और बारिश का गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। एक महिला दुकानदार ने भावुक और आक्रोशित होते हुए बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ भाजपा की सरकार बनाई थी और अन्य दुकानदारों को भी वोट देने के लिए प्रेरित किया था। लेकिन आज स्थिति यह है कि वही दुकानदार उन्हें उलाहना दे रहे हैं और गालियां निकाल रहे हैं। महिला ने कहा, “आज दुकानदार खाली बैठे हैं, बिजली का बिल और दुकान का किराया अपनी जेब से भर रहे हैं, लेकिन कोई नेता या इंजीनियर सुध लेने नहीं आता।”
फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के कारण रेलवे रोड और घंटाघर चौक का रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध और उबड़-खाबड़ हो गया है। बड़े-बड़े पत्थरों और मिट्टी के ढेरों के बीच से गुजरना राहगीरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दुकानदारों का आरोप है कि निर्माण कार्य अत्यंत लापरवाही और “टेंपरेरी” तरीके से किया जा रहा है। गड्ढों को ढकने के लिए केवल बोरियों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। व्यापारियों का तर्क है कि फ्लाईओवर जनता की सुविधा के लिए होता है, लेकिन यहां तो जनता को नर्क जैसी स्थितियों में धकेला जा रहा है।
पार्किंग की समस्या ने आग में घी डालने का काम किया है। पुरानी नगर निगम की जगह पर बनी पार्किंग में जब ठेकेदारों ने पाइप लगाकर गंदा पानी छोड़ना शुरू किया, तो वहां खरीदारी करने आए परिवारों की गाड़ियां गंदगी के बीच फंस गईं। आधा घंटा पहले जो पार्किंग साफ थी, वह अचानक गंदे नाले में तब्दील हो गई। वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें अपनी गाड़ी तक जाने के लिए घुटनों तक गंदे पानी और कीचड़ से गुजरना पड़ रहा है। ठेकेदारों की इस करतूत पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि पानी को टैंकरों के जरिए बाहर डिस्पोज किया जाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक पार्किंग में।
प्रशासनिक स्तर पर भी भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें दुकानों को शिफ्ट करने या खाली करने का सुझाव तो दिया जाता है, लेकिन उनके पुनर्वास या मुआवजे के बारे में कोई ठोस योजना नहीं है। जो दुकानदार 50-60 सालों से अपने परिवार पाल रहे हैं, वे अचानक अपनी आजीविका कैसे छोड़ दें? व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ और निर्माण कार्य में तेजी नहीं लाई गई, तो वे कड़ा विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
फिलहाल, घंटाघर चौक से लेकर रेलवे रोड तक का पूरा इलाका धूल, गंदगी और बदबू की चपेट में है। फ्लाईओवर का काम जिस धीमी गति से चल रहा है, उसे देखते हुए ऐसा प्रतीत नहीं होता कि दुकानदारों को जल्द ही इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिलेगी। प्रशासन की इस बेरुखी ने न केवल शहर की सूरत बिगाड़ दी है, बल्कि सरकार के प्रति जनता के विश्वास को भी गहरी चोट पहुँचाई है।