इंसानियत और बहादुरी की एक ऐसी दास्तां सामने आई है जो आंखों में आंसू और दिल में गर्व भर देती है। हरियाणा के करनाल जिले के इंद्री क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपनी जान की परवाह किए बिना नहर में डूब रही एक लड़की को बचाने के लिए छलांग लगा दी। हालांकि उसने लड़की को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन वह स्वयं लहरों के बीच जिंदगी की जंग हार गया। मृतक की पहचान 40 वर्षीय बलकार के रूप में हुई है, जो सोनीपत जिले के बुटाना गांव का रहने वाला था और वर्तमान में इंद्री के रेस्ट हाउस में मल्टीटास्किंग स्टाफ (MTS) के पद पर तैनात था।
यह हृदयविदारक घटना सोमवार दोपहर करीब 2:00 से 3:00 बजे के बीच की बताई जा रही है। बलकार इंद्री हेड के पास स्थित रेस्ट हाउस में अपनी ड्यूटी पर तैनात था। तभी अचानक उसे नहर में एक कम उम्र की लड़की के डूबने और चीख-पुकार की आवाज सुनाई दी। लड़की ने संभवतः आत्महत्या के इरादे से नहर में छलांग लगाई थी। बलकार को तैरना आता था और उसने बिना एक पल गंवाए अपनी वर्दी उतारकर नहर में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों और बलकार के सहकर्मियों के अनुसार, उसने पूरी ताकत लगाकर लड़की को किनारे की ओर धकेला, जहां उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लड़की को तुरंत इंद्री के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे करनाल रेफर कर दिया गया। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
लड़की को बचाने के बाद जब बलकार स्वयं किनारे की ओर आने लगा, तो बताया जा रहा है कि नहर के तल में बने किसी गहरे गड्ढे या रेतीली मिट्टी में उसका पांव बुरी तरह फंस गया। बलकार ने बाहर निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों और पानी के बहाव के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाया और देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गया। मौके पर मौजूद उसके सहकर्मी और अन्य लोगों ने तुरंत नहर में उतरकर उसकी तलाश शुरू की। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बलकार का शव बरामद किया जा सका।
बलकार के परिजनों और सहकर्मियों ने बताया कि वह एक बेहद मिलनसार और परोपकारी व्यक्ति था। वह अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसके ऊपर दो छोटे बच्चों (उम्र लगभग 10 और 14 वर्ष), अपनी पत्नी, माता-पिता और तीन बहनों की जिम्मेदारी थी। उसकी शादी करीब 18-19 साल पहले हुई थी। 2020 में उसने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत नौकरी शुरू की थी। रेस्ट हाउस नहर के बिल्कुल पास होने के कारण वह अक्सर डूबते हुए लोगों की मदद करता रहता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि दूसरों का जीवन बचाने वाला यह फरिश्ता एक दिन खुद इसी नहर की भेंट चढ़ जाएगा।
फिलहाल बलकार के शव को करनाल के नागरिक अस्पताल के मर्चरी हाउस में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। गोहाना से उसके परिजन करनाल पहुँच चुके हैं और मोर्चरी के बाहर मातम पसरा हुआ है। बलकार के साथियों और परिजनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस गरीब और बहादुर परिवार की आर्थिक मदद की जाए, क्योंकि घर का सहारा छीन जाने के बाद मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो दूसरों की जान बचाने के लिए हंसते-हंसते अपनी कुर्बानी दे देते हैं।