हरियाणा के करनाल जिले के छोटे से गांव मुनक में आज खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। गांव के एक साधारण परिवार के युवक लवकेश गुप्ता ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। लवकेश ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा में 488वीं रैंक प्राप्त की है। जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, पूरे मुनक गांव में जश्न का माहौल बन गया। लोग ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते नजर आए और मिठाइयां बांटकर एक-दूसरे को बधाई दी।
लवकेश की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनका पालन-पोषण और प्रारंभिक शिक्षा बेहद सीमित संसाधनों के बीच हुई है। उनके पिता गांव में ही एक छोटी सी किराने (करियाना) की दुकान चलाते हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के बावजूद लवकेश ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। उनकी इस उपलब्धि पर उनके पिता, माता और बहनों की आंखों में खुशी के आंसू साफ देखे जा सकते हैं। परिवार का कहना है कि लवकेश बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहा है। उसने दसवीं कक्षा में जिला स्तर पर टॉप किया था और बारहवीं में भी 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।
लवकेश की शिक्षा की यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने मुनक गांव के ही सरकारी स्कूल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की और इसके बाद असंध के सरकारी कॉलेज से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। यह उन सभी छात्रों के लिए एक बड़ा संदेश है जो मानते हैं कि बड़ी सफलता केवल बड़े निजी स्कूलों या कोचिंग संस्थानों से ही मिल सकती है। लवकेश ने साबित कर दिया कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो सरकारी स्कूल-कॉलेज में पढ़कर भी आकाश छुआ जा सकता है।
अपनी तैयारी के दिनों को याद करते हुए लवकेश बताते हैं कि 2022 से वह इस परीक्षा के लिए गंभीर रूप से जुटे हुए थे। यह उनका चौथा प्रयास था। इससे पहले के तीन प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) भी पास नहीं कर पाए थे। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करना जारी रखा। चौथे प्रयास में उन्होंने न केवल प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा पास की, बल्कि अपने पहले ही साक्षात्कार (इंटरव्यू) में सफलता के झंडे गाड़ दिए।
लवकेश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के अटूट सहयोग को दिया है। उन्होंने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, जिससे कई बार भावनात्मक अस्थिरता भी महसूस होती थी। लेकिन उनके माता-पिता और बहनों ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया। लवकेश ने बताया कि तैयारी के दौरान वह खुद को एक कमरे में सीमित रखते थे और घंटों पढ़ाई में लीन रहते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उनके पिता ने कभी उन्हें दुकान पर बैठने के लिए मजबूर नहीं किया और हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
देश के अन्य युवाओं को संदेश देते हुए लवकेश ने कहा कि 22 से 28 वर्ष की आयु अक्सर बहुत दबाव वाली होती है। इस दौरान कई बार हताशा और असफलता का सामना करना पड़ता है, लेकिन युवाओं को टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और अगर आप निरंतर प्रयास करते रहते हैं, तो जीवन में कहीं न कहीं जरूर सफल होते हैं। लवकेश का सपना आईएएस (IAS) बनने का है और वह अपनी रैंक में सुधार के लिए आगे भी प्रयास जारी रखने का इरादा रखते हैं। फिलहाल, पूरा गांव अपने इस लाडले की उपलब्धि पर गौरवान्वित है।