हरियाणा के किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। करनाल में हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चे की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, प्रदेश भर के किसान 23, 24 और 25 फरवरी को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास के बाहर तीन दिवसीय महापड़ाव डालेंगे। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील, प्रदेश में बुढ़ापा पेंशन की कटौती और किसानों की कर्ज मुक्ति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
किसान नेताओं का आरोप है कि अमेरिका के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय किसानों के लिए ‘डेथ वारंट’ के समान है। नेताओं का तर्क है कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी कृषि कंपनियों के उत्पादों के भारतीय बाजार में आने से स्थानीय किसानों की रीढ़ टूट जाएगी। छोटे किसान उन उत्पादों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे जिन्हें अमेरिका में भारी सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा, राज्य में लगभग 72,000 बुजुर्गों की बुढ़ापा पेंशन काटने और मनरेगा के बजट में कटौती को लेकर भी किसानों में गहरा रोष है।
आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए किसान नेताओं ने बताया कि कुरुक्षेत्र कूच से पहले 17 और 18 फरवरी को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें पुतले फूंके जाएंगे। 23 फरवरी को सुबह 10:30 बजे सभी किसान कुरुक्षेत्र के ताऊ देवीलाल पार्क में एकत्रित होंगे और वहां से मुख्यमंत्री आवास की ओर प्रस्थान करेंगे। किसानों ने अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रालियां, बिस्तर और राशन लाने की तैयारी कर ली है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं।
प्रदर्शनकारी किसानों ने धान घोटाले की जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 5 से 6 हजार करोड़ रुपये के इस घोटाले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े ‘मगरमच्छों’ को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। किसानों की मांग है कि एमएसपी की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए और किसान-मजदूरों को कर्ज मुक्त किया जाए। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो महापड़ाव के दौरान ही आगामी सख्त कदम उठाए जाएंगे।