March 3, 2024


करनाल/कीर्ति कथूरिया :  श्री खाटू श्याम कीर्तन मंडल करनाल की तरफ से श्रीमद् भागवत सप्ताह के चौथे दिन आज कथा वाचक पूज्य जया किशोरी जी ने कथा में आज समुद्र मंथन,वामन अवतार,एवं श्री कृष्ण जन्म महोत्सव कथा का प्रसंग सुनाया।

आज की कथा में मुख्य यजमान के रूप में सुनील एवं संगीता गुप्ता, पंकज एवं ममता गोयल,अतुल जैन, भाविक बंसल, अनुभव बंसल, निखिल गुप्ता, शोभित गुप्ता,गौरव गोयल, सचिन गोयल रहे।

कथा वाचक जया किशोरी जी ने व्यास पीठ को नमन किया। आज की कथा अध्यात्म को व्यवहार में उतारना ही कर्म योग है।उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन संपदा क्षण भंगुर होती है।कथा में बताया कि द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी कथा सुनाने के लिए तथा उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई।

पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे । ब्रह्मा जी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु अन्नत शैया पर शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई भगवान ने ब्रह्मा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोली-भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूँ। मेरा उद्धार किजिए।

यह सुनकर भगवान विष्णु उन्हें आश्वस्त करते हुए बोले – “चिंता न करें, मैं नर-अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा। भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ उनके जन्म लेते ही जेल ही कोठरी में प्रकाश फैल गया।

वासुदेव देवकी के सामने शंख, चक्र, गदा, एव पद्म धारी चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा,”अब मै बालक का रूप धारण करता हूँ तुम मुझे तत्काल गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दो। श्रीकृष्ण के जन्म की इस पुण्य तिथि को तभी से सारे देश में बड़े हर्षोल्लास से जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। नन्द के आनद भइयो जय कन्हैया लाल के भजन के साथ आज का प्रसंग संपन्न हुआ।आज की कथा में श्री खाटू श्याम कीर्तन मंडल के सभी सदस्य सहित हजारों की संख्या में भक्त जन मौजूद रहे।

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