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डीएवी पीजी कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान विभाग की ओर से भारतीय संघवाद के बदलते आयाम विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे एवं अंतिम दिन मंगलवार को कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत रूप से  प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी द्वारा दीप प्रज‌वल्लित करके किया। राष्ट्रीय सेमीनार अंतिम दिन दो तकनीकी सत्रों और एक विदाई सत्र के रूप में आयोजित किया गया। प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में भारतीय संघवाद के बदलते आयाम विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जरूरी था। क्योंकि यह बहुत ही पुराना विषय  है और मौजूदा हालात में भारतीय संघीय व्यवस्था में काफी परिवर्तन आए हैं। जो‌ इस सेमीनार के माध्यम से शोधार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे और नए विद्यार्थियों को भी इससे जानने का मौका मिलेगा।
पहले तकनीकी सत्र में दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामजीलाल ने अध्यक्षता की। रिसोर्स पर्सन डॉ. पवन शर्मा ने भारतीय संघवाद और अमेरिका के संघवाद के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमने अमेरिका से संघवाद की प्रवृति अपनाई जरूर है। लेकिन यह भारतीय परिस्थितियों में लागू किया गया है। इसलिए इसमें विभिन्नता है।  प्रो. रामपाल भाटी ने भारतीय संघवाद का संविधानिक प्रस्तुतिकरण देते हुए बताया कि भारतीय संघवाद में समय समय पर बदलाव आया है। डॉ. एसएस नैन ने 2014 के बाद संघवाद के बदले आयामों की चर्चा की। इसमें उन्होंने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व मजबूत हुआ है और क्षेत्रीय दलों का प्रभाव कम हुआ है।
दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. अनीता अग्रवाल ने की। इस सत्र में रिसोर्स पर्सन वीके शर्मा ने सता और शक्ति के विभाजन पर बात रखी और उन्होंने कहा कि धारा 356 का सत्ताधारी दलों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है। जिससे केंद्र और राज्यों में तनाव की स्थिति बनी है।
तीसरे और विदाई सत्र में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. पीडी शर्मा ने अध्यक्ष के रूप में शिरकत की। वहीं डॉ. रणबीर सिंह ने विदाई भाषण देकर कार्यक्रम को समापन की ओर बढ़ाया। प्रो. रणबीर सिंह ने आजादी से लेकर के वर्तमान समय तक संघवाद जिन दौरों से गुजरा उसके बारे में शोधार्थियों को अवगत करवाया और उस समय में राजनीतिक दलों और सरकारों के कार्यकाल में संघवाद की विचारधारा के बारे में जानकारी प्रदान की। डॉ. पीडी शर्मा ने कहा कि अगर समान रूप से आर्थिक वितरण हो तो वर्तमान समय में संघवाद को कोई खतरा नहीं है। इसी के साथ उन्होंने अशंका जताई कि राज्यों और केंद्र में 2019 के नतीजों के बाद संघवाद को कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने नीति आयोग और जीएसटी के संघवाद पर प्रभाव की भी चर्चा की।
कार्यक्रम में डॉ. बीके कौशिक और प्रो. दिले राम ने विशेष रूप से आंमत्रित अतिथियों के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संगोष्ठी के दौरान रिसोर्स पर्सन द्वारा प्रस्तुत शोध पत्रों की समीक्षा भी की। कार्यक्रम के संचालक राजनीतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष बलराम शर्मा ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत कर कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी ने सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी को बधाई दी। इस मौके कॉलेज के पूरे स्टाफ सहित देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से विद्धान एवं शोधार्थी सम्मलित हुए।

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