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राजकीय महाविद्यालय करनाल के जन संचार और इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में “सिंगापुर विद्रोह 1915” पर ख्यात पत्रकार, फिल्मकार और इतिहास शोधार्थी श्री दलजीत ऐमी ने दो विस्तार व्याख्यान दिए। उल्लेखनीय है की 5 वीं लाइट इन्फैंट्री के सैंकड़ों जवानों ने जो उस समय अंग्रेजी राज के अधीन सिंगापुर में नियुक्त थे बगावत कर दी थी जिसे अंततः दबा दिया गया और 41 जवानों को जेल की दिवार के साथ खड़ा करके गोलियों से उड़ा दिया गया। उल्लेखनीय है की ऐसे शहीद ज्यादातर सैनिक वर्तमान हरियाणा से थे। श्री दलजीत जो फिलहाल बी.बी. सी. में कार्यरत हैं ने बहुत विस्तार से बताया की किस तरह से उन्होंने सिंगापुर से लेके हरियाणा के विभिन्न गावों में इन शहीदो से जुड़े ऐतिहासिक स्रोतों को खोजने के लिए  सिंगापुर से हरियाणा के विभिन्न गावों में उन शहीदों की निशानियों और स्मृतियों की तलाश की। श्री दलजीत का कहना था की इस खोज यात्रा में उन्हें बहुत कुछ समझने को मिला जिसका दुखद मानवीय पहलू ये है कीे ज्यादातर शहीद सैनिकों के परिवार भारत विभाजन के वक़्त पकिस्तान चले गए और उन गावों मे पाकिस्तान से आकर बसे परिवारों को उस गाँव के इतिहास के इस पक्ष की जानकारी नहीं है।
लेकिन इसका सुखद पक्ष भी सामने आता है जब इन गावों के लोग सिंगापुर में गोलियों से मारे गए सैनिकों की तस्वीर देखते हैं तो वो तुरन्त इस तथ्य को गाँव की साझी विरासत से जुड़ कर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। उनका कहना था की इतिहास का यही सबसे बड़ा काम होता है की वो भुला दिए गए अतीत में से अनाम और अल्पज्ञात अनेकों अनेक आमजन के आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को संरक्षित करे ताकि भावी पीढी भी प्रेरणा ले। इसके साथ ही दूसरे व्याख्यान में ऐतिहासिक विषय और और पत्रकारिता में दृश्य माध्यम की प्रभावशाली और सशक्त भूमिका पर भी अनेकों तस्वीरों को दिखाते हुए विस्तार से समझाया।
विस्तार व्याख्यान के मुख्य वक्ता श्री दलजीत ऐमी का स्वागत प्राचार्य डॉ प्रवीण भारद्वाज ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ महेंद्र बाग़ी ने प्रस्तुत किया। विस्तार व्याख्यान में जन संचार व इतिहास विभाग के विद्यार्थियों के अलावा वरिष्ठ प्रो राजबीर सिंह, डॉ रामधन, डॉ जरनैल सिंह, डॉ अमरदीप, डॉ दिनेश, डॉ तंजुम सहित अनेकों आचार्यो ने भाग लिया। मंच संचालन डॉ प्रदीप जाखड़ ने प्रश्नोत्तर सत्र और मंच संचालन किया और विस्तार व्याख्यान के आयोजन प्रबंधन के लिए श्रीमति रश्मि सिंह का आभार प्रकट करते हुए आयोजन का समापन किया।

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