July 12, 2026
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  •  खेतों में घुसा पानी, आज 2 जिलों में बारिश का अलर्ट

करनाल ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में मानसून अब मुख्य रूप से उत्तरी क्षेत्रों पर अपना असर दिखा रहा है। पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे मैदानी इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

हिमाचल की पहाड़ियों से आ रहे पानी के चलते यमुना और मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिसकी वजह से गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। करनाल और सोनीपत में जमीन का कटाव शुरू हो गया है। आसपास के खेत पानी में डूब गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज (रविवार को) उत्तरी हरियाणा के पंचकूला और यमुनानगर में भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल में हल्की से मध्यम और जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ में बूंदाबांदी की संभावना है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी और चरखी दादरी में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने का अनुमान है।

हरियाणा में 24 घंटे में कहां कितनी बारिश हुई

पिछले 24 घंटों में हरियाणा के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक बारिश यमुनानगर के बिलासपुर में 7 सेमी (70 mm) दर्ज की गई। इसके अलावा प्रतापनगर, जगाधरी, छछरौली, सढौरा और चंडीगढ़ में 5-5 सेमी बारिश हुई।

वहीं फिरोजपुर झिरका, पेहोवा और बालसमंद में 4-4 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई। कनीना, ताजेवाला और सरस्वती नगर में 3-3 सेमी, जबकि हिसार, सिवानी, महेंद्रगढ़, कौल और इसमाईलाबाद में 2-2 सेमी बारिश हुई। रादौर, रेवाड़ी, मोरनी, बावल, लाडवा और बरारा में 1-1 सेमी पानी बरसा।

मारकंडा नदी के पानी से 4 गांव प्रभावित

 कुरुक्षेत्र मे मारकंडा नदी में शनिवार सुबह 14 हजार 294 क्यूसेक पानी पहुंचने के बाद शाहाबाद क्षेत्र के कठवा, कलसाना, तंगोर और मोहनपुर गांव प्रभावित हो गए। सबसे ज्यादा असर कठवा में रहा, जहां मुख्य सड़क पानी में डूबने से आवागमन बाधित हो गया। स्कूल बस के पूरे टायर पानी में समा गए। लोग सड़क पर हुए जलभराव से ही निकलते रहे। नदी का पानी आसपास के खेतों में भी फैल गया। जलस्तर घटकर 11 हजार 711 क्यूसेक रह गया।

हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर 33 हजार क्यूसेक रहा

 शनिवार सुबह 10:00 बजे हथिनी कुंड बैराज पर यमुना नदी का जलबहाव 33 हजार 079 क्यूसेक रहा। यूपी की डिमांड 2000 से घटकर 260 क्यूसेक रही, वहीं दिल्ली और हरियाणा को पश्चिमी यमुना नहर से 12 हजार 10 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की गई। बैराज से सरप्लस 20 हजार 809 क्यूसेक सरप्लस पानी को दिल्ली की ओर नदी में छोड़ा गया।

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