करनाल ब्रेकिंग न्यूज : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नगर निगम पंचकूला में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर निगम आयुक्त और आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया है। यह मामला सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में नगर निगम के खाते से हुए करोड़ों रुपये के गबन से जुड़ा है। CBI जांच में सामने आया है कि नगर निगम का बैंक खाता हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के नियमों के खिलाफ जाकर खोला गया था। जांच एजेंसी के अनुसार खाते की जानकारी इस तरह भरी गई थी ताकि बाद में होने वाले फर्जी लेन-देन को आसानी से छिपाया जा सके।
जांच में यह भी पता चला कि तत्कालीन आयुक्त आरके सिंह ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बनाने के नाम पर कई हस्ताक्षर किए हुए चेक बैंक अधिकारियों तक पहुंचाए। इन चेकों के जरिए नगर निगम के खाते से पैसे निकाले गए, लेकिन कोई एफडी नहीं बनाई गई। निकाली गई रकम को कथित तौर पर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। CBI के मुताबिक इस पूरे मामले में नगर निगम के वरिष्ठ लेखाकार विकास कौशिक की भी अहम भूमिका थी।
करीब 79.46 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा मामला
विकास कौशिक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरके सिंह की भूमिका सामने आने के बाद CBI ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ और करनाल स्थित उनके घरों पर छापेमारी कर कई जरूरी दस्तावेज बरामद किए हैं। यह मामला करीब 79.46 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है। जांच में यह भी सामने आया है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये फर्जी एफडी और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में भेजे गए। अब तक CBI इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। CBI ने बताया कि वह चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL), चंडीगढ़ नगर निगम और CREST चंडीगढ़ से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। इन मामलों में भी कई बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
CBI का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और गबन की पूरी रकम का पता लगाने के लिए जांच जारी रहेगी।