- एक्टर बोला- ₹5 लाख खर्च किए, गाना नहीं हटाऊंगा
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणवी सॉन्ग “कॉलेज वाली छोरी सेट कंडक्टर के” को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों ने इस सॉन्ग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साफ चेतावनी दी है कि यदि सॉन्ग को हटाया नहीं गया या इसके बोल नहीं बदले गए तो पूरे प्रदेश में चक्का जाम कर आंदोलन किया जाएगा।
कर्मचारियों का आरोप है कि सॉन्ग में कंडक्टरों की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। इसे वे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते। वहीं, बढ़ते विरोध पर सॉन्ग के एक्टर नवीन नारू का बयान भी सामने आया है। उन्होंने भी स्पष्ट शब्दों में कहा-गीत में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है और इसे अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाया जा रहा है। बेशक एफआईआर हो जाए, गाना डिलीट नहीं किया जाएगा। सॉन्ग बनाने में करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए हैं। यदि मामला कानूनी रूप लेता है तो वह भी न्यायालय का सहारा लेंगे।
इसके अलावा उन्होंने दो टूक कहा कि चाहे रोडवेज कर्मचारी आंदोलन करें, प्रदर्शन करें या चक्का जाम करें, वह अपना गीत डिलीट नहीं करेंगे। उधर, इस मामले में हरियाणा महिला आयोग ने कहा कि अभी उनके पास शिकायत नहीं पहुंची है। जैसे ही कोई शिकायत आएगी, सॉन्ग को देखकर संज्ञान लिया जाएगा।
24 मई को रिलीज हुए सॉन्ग के बोल क्या…
हाल ही में रिलीज हुए हरियाणवी सॉन्ग “कॉलेज वाली छोरी सेट कंडक्टर के” को सोमबीर खटक ने गाया है, जबकि नवीन नारू और सोनिका सिंह ने इसमें अभिनय किया है। यह सॉन्ग नवीन नारू के यूट्यूब चैनल पर 24 मई रिलीज किया गया है। सॉन्ग के लिरिक्स इस तरह से हैं-एक कॉलेज वाली छोरी हो गई सेट कंडक्टर के, घणे दिनां में घट गया पेट कंडक्टर के। कदे दादरी, कदे लोहारू, कदे रूट था पिलानी का, इब छोड़ दादरी, छोड़ रूट लोहारू का, पकड़ लिया रूट भिवानी का। सपना में आवे उसका गेट कंडक्टर के, एक कॉलेज वाली छोरी हो गई सेट कंडक्टर के।” सूखी पड़ी थी खेती, उसने देखो आज हरी कर दी, उसके चक्कर में ऊके गांव की छोरी चार फ्री कर दी।” नजरां आली लत लगी कंडक्टर के, एक कॉलेज वाली छोरी हो गई सेट कंडक्टर के।” यो खास कंडक्टर मकड़ानी का, उसने ना कोई दुखड़ा राखे, दो नंबर की सीट हमेशा उसके खातिर बुक राखे।
गाना कंडक्टरों की सामाजिक छवि खराब कर रहा
हरियाणा रोडवेज हिसार डिपो की सांझा मोर्चा संघर्ष समिति के प्रतिनिधि संदीप कुमार का कहना है कि यह सॉन्ग कंडक्टरों की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। सॉन्ग में नौकरी और छात्राओं को लेकर भ्रामक तथा आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे समाज में गलत धारणा बन रही है।
समाज में गलत संदेश जा रहा है
यूनियन नेताओं का कहना है कि यह सॉन्ग केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज में एक गलत संदेश भी प्रसारित कर रहा है। उनका मानना है कि ऐसे गीत युवाओं के बीच गलत सोच को बढ़ावा देते हैं और पेशेगत सम्मान को प्रभावित करते हैं।
शादी में बेटी के साथ खड़ा कंडक्टर क्या महसूस करेगा
संदीप कुमार ने कहा कि आगामी दिनों में शादी समारोहों और अन्य आयोजनों में यह सॉन्ग खूब बजाया जाएगा। ऐसे में यदि कोई कंडक्टर अपनी बेटी और परिवार के साथ किसी समारोह में मौजूद होगा और यह गीत बजेगा तो उससे बड़ा अपमान उसके लिए कोई नहीं होगा। एक पिता और कर्मचारी दोनों रूपों में यह स्थिति बेहद असहज और दुखद होगी।
शिकायत के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की
यूनियन से जुड़े कर्मचारियों की ओर से हिसार सिटी थाना में सॉन्ग को लेकर लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यूनियन प्रतिनिधि संदीप कुमार ने बताया कि इसी कारण कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।