त्रिवेणी प्रकृति का अनुपम वरदान तथा ईश्वर की अनोखी देन: बृज शर्मा

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इनेलो के राष्ट्रीय महासचिव बृज शर्मा ने आज निर्जला एकदशी पर समाधानांचल सेवा समिति द्वारा चलाए जा रहे त्रिवेणी लगाने के पुण्य कार्य को आगे बढ़ाते हुए समाधानांचल की राष्ट्रीय अध्यक्षा एडवोकेट संतोष यादव के सहयोग से सैक्टर-8 की ग्रीन बैल्ट में 198वीं त्रिवेणी लगाई। इस दौरान उन्होंने पौधारोपण करते हुए उपस्थित लोगों को त्रिवेणी से होने वाले लाभों के बारे में अवगत करवाया।

सम्बोधन में बृज शर्मा ने कहा कि त्रिवेणी नीम, पीपल और बड़ का संगम होता है। त्रिवेणी प्रकृति का अनुपम वरदान तथा ईश्वर की अनोखी देन है। इसे धरती पर अमृततुल्य माना जाता है और इन तीनों के बिना जीवन अधूरा है। त्रिवेणी से जहां लोगों को अनेक रोगों से मुक्ति मिलती है वहीं यह जीवन का आधार माना गया है। पर्यावरण को बचाने एवं स्वच्छ ऑक्सीजन देने में त्रिवेणी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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यदि व्यक्ति अपने जीवन में एक बार त्रिवेणी लगाता है तो आने वाले कई पीढिय़ों को इसका लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि नीम, पीपल और बरगद इन तीनों को सामान गुणी होने के कारण त्रिवेणी कहा जाता है। नीम, पीपल और बड़ पर्यावरण को सबसे अधिक शुद्ध बनाते हैं। हमारे प्राचीन शास्त्रों में तीनों पौधों को ब्रह्म, विष्णु व महेश कहा जाता है। उन्होंने कहा कि वृक्ष ही मानव जीवन के लिए सबसे अधिक लाभदायक है जो मनुष्य को बहुत कुछ देते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने घरों के आसपास भी पेड़ लगाकर उनकी रक्षा करें।

समाधानांचल की राष्ट्रीय अध्यक्षा एडवोकेट संतोष यादव ने कहा कि त्रिवेणी (बड़, नीम और पीपल) का शास्त्रों में भी विशेष महत्व है। हर इंसान को अपने जीवन में कम से कम एक त्रिवेणी अवश्य लगानी चाहिए। जैसे-जैसे त्रिवेणी बढ़ती है वैसे ही आपकी सुख-स्मृद्धि भी बढ़ेगी और आपके सभी कष्ट स्वत: मिट जाएंगे। उन्होंने कहा कि हर इंसान के थोड़े-थोड़े योगदान से एक बड़ी चीज का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि दूसरों की भलाई के लिए जो सांसे हमने जी हैं वही असल में जिंदगी है।

समाधानांचल के स्टेट कोर्डिनेटर एवं इनेलो नेता रामदयाल बलड़ी ने कहा कि त्रिवेणी में सभी देवी-देवताओं एवं पितरों का वास माना जाता है। त्रिवेणी हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देती है और आने वाली भावी पीढ़ी के लिए भी वरदान साबित होती है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण के प्रति हमें कटिबद्ध होने की जरुरत है। यदि वृक्षों का संरक्षण और नये पौधों का रोपण नहीं किया गया तो हमारी आने वाली पीढिय़ा शुद्ध वायु के लिए तरस जाएंगी और पूरी मानवता पर संकट खड़ा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि ये त्रिवेणी एक साधारण वृक्ष न होकर इसका अध्यात्मिक महत्व है। त्रिवेणी को शास्त्रों में स्थाई यज्ञ की संज्ञा दी गई है। जहां त्रिवेणी लगी होती है वहां हर पल हर क्षण सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह चलता रहता है। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी हमे हमारी संस्कृति से जुडऩे का संदेश देती हैं। जहां त्रिवेणी लगी होती हैं वहां हर पल सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता हैं। त्रिवेणी प्राणियो में प्राणो का संचार करती हैं और जब तक पृथ्वी पर प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है तब त्रिवेणी सहियोग प्रदान करती है। इस अवसर पर  परमदयाल, मनीष गुप्ता, अमन शर्मा, राघव शर्मा, श्रीमती राज शर्मा, गुरताज विर्क सहित अन्य उपस्थित रहे।


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