लोकसभा चुनाव को लेकर जिला प्रशासन ने किया संकलन एवं लेखन कार्यशाला का किया आयोजन

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  • पत्रकार को ना काहू से दोस्ती, ना काहू सेे बैर की नीति पर चलकर निïïष्पक्षता से कार्य करना चाहिए- उमेश जोशी।
  • पत्रकार का काम समाज को जोडऩा है, तोडऩा नही, निïष्पक्ष पत्रकारिता से बढ़ता है मीडिया का सम्मान।
  • लोकसभा चुनाव को लेकर जिला प्रशासन ने किया संकलन एवं लेखन कार्यशाला का किया आयोजन।

लोकसभा आम चुनाव की प्रक्रिया के बीच उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी की पहल पर शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में समाचार संकलन एवं लेखन विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें दीर्घानुभवी पत्रकार उमेश जोशी ने चुनाव के दौरान पत्रकारो को निष्पक्ष होकर रिपोर्टिंग करने के टिप्स दिए और कहा कि पत्रकार को ना काहू से दोस्ती, ना काहू सेे बैर की नीति पर चलना चाहिए।

पत्रकार का पेशा तलवार की धार पर चलने के समान है। किसी भी समाचार के लिए किया गया आंकलन गलत हो सकता है, लेकिन पत्रकार की नीयत गलत नही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी न्यूज़ ना देंं, जिससे समाज में वैमनस्य ना हो। पत्रकार का काम जोडऩा है, समाज को तोडऩा नही। पत्रकार एक साधारण आदमी से अलग है, जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करता है, इसलिए उसे सृजनात्मक तरीके से काम करना चाहिए।

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पत्रकार का कार्य केवल सूचनाओं को संकलन कर समाचार देना ही नही है, बल्कि वे अपने पेशे के अनुरूप समाज का एक अति जिम्मेवार व्यक्ति है, क्योकि उसकी रिपोर्टिंग पर पाठक विश्वास करते हैं।

जोशी ने अपना व्यख्यान पेड न्यूज़ से शुरू करके सोशल मीडिया के मौजूदा स्वरूप तक जारी रखते हुए लम्बे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहने के दौरान अपने अनुभवो को उपस्थित मीडिया कर्मियो के साथ सांझा किया और प्रसंगो के माध्यम से ऐसे पहलुओ को उजागर किया, जो आधुनिक और नवोदित पत्रकारो के लिए अर्थपुर्ण थे। उन्होंने कहा कि बेशक आज मीडिया पर बड़े-बड़े घरानो का कब्जा है और पत्रकार उनके ईशारे पर काम करते हैं, लेकिन सही मायनो में पत्रकार वह है, जो अपने विवेेक से रिपोर्टिंग करे।

उसके इस व्यवहारिक दृष्टिïकोण से समाचार और समाचार पत्र में सत्यता आती है। पढऩे वाले उस पर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी समाचार के साथ पाठक का जुड़ाव तब तक रहता है, जब उसे लगे कि सब कुछ तथ्यो के आधार पर छापा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार अपने पेशे के प्रति ईमानदार नही, तो वह अपने पाठको के प्रति भी ईमानदार नही है, क्योकि पाठक या दर्शक मूर्ख या बोला नही है।

उमेश जोशी ने अपने व्याखान में बताया कि जब भी कोई समाचार तैयार किया जाए, उसकी क्रोस चैकिंग जरूरी है,क्योंकि पूरी खबर में एक भी गलत तथ्य हो, उसको निष्प्रभावी कर देती है। समाचार संकलन के लिए उस सम्बंधित क्षेत्र की पूरी जानकारी होनी चाहिए। सुनी-सनाई बात पर भरोसा ना करें। समाचार नीरस ना लगे, इसके लिए जरूरी है कि विश्लेषण करें। अपनी तरफ से सारांश तक ना जाएं, बल्कि विंडो खुली रखें, ताकि उसमें गुंजाईश बनी रहे। उन्होंने कहा कि पूर्वाग्रही होकर भी खबर ना करें, ऐसी खबर हमेशा गलत साबित होगी।

वरिष्ठï पत्रकार के.बी. पंडित ने वर्कशॉप में बोलते हुए कहा कि पत्रकार का कार्य चुनौती पूर्ण है, इसलिए उसे गम्भीर रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने कुछ दशक पहले और आज की पत्रकारिता में काफी अंतर बताया। उन्होंने कहा कि पहले रिपोर्टिंग में मार्किटिंग का बोल-बाला नही था, अब ज्यादा हो गया है।

पत्रकारो की स्वतंत्रता सीमित हो गई है, बल्कि उन्हे मेनेजमेंट से जो निर्देश मिलते हैं, उन पर काम करना पड़ता है। चुनावो में पेड न्यूज़ और आदर्श आचार संहिता पर बोले हुए उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र को बनाए रखने के लिए नियम ही काफी नही है, पत्रकारो को भी संयम से काम लेना चाहिए। कोई उनका इस्तेमाल करे, इससे बचना चाहिए।

बॉक्स- पेड न्यूज़ पर एम.सी.एम.सी. कमेटी रखेगी कड़ी नजर, मीडिया आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से बचे – विनय प्रताप सिंह। 

करनाल लोकसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव में आदर्श आचार संहिता का पालन सबके लिए जरूरी है। स्वतंत्र, निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव करवाने में मीडिया का अहम रोल रहता है। उन्होंने पेड न्यूज़ की प्रवृति पर अंकुश लगाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग की ओर से बनाई गई मीडिया सर्टिफिकेशन व मॉनिटरिंग कमेटी के उद्ïदेश्य पर बोलते हुए कहा कि यदि कोई उम्मीदवार या उसका समर्थक चुनाव में अपना पक्ष पैसे देकर पेड न्यूज़ छपवाता है, तो उसका खर्चा उम्मीदवार के खर्च में जोड़ा जाता है।

यही नही इस कमेटी की ओर से उसे कारण बताओ के लिए नोटिस भी दिया जाता है, क्योंकि ऐसा करना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इलैक्ट्रोनिक मीडिया में विज्ञापन से पहले सम्बंधित उम्मीदवार को इस कमेटी से पहले सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। विज्ञापन में ऐसे कॉन्टैंट्ïस नही होने चाहिए, जिनसे किसी दूसरी पार्टी या उम्मीदवार का हित हो और समाज को बांटने जैसा काम हो। उन्होंने कहा कि अब सोशल मीडिया का जमाना आ गया है। इससे जुड़े वैबकास्टर को ऐसा कोई कार्य नही करना चाहिए, जिससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो।

बॉक्स- आदर्श आचार संहिता ना केवल राजनीतिक दलों पर, बल्कि हर व्यक्ति पर होती है लागू-गौरव कुमार।

घरौण्ड़ा के एस.डी.एम. एवं लोकसभा चुनाव में प्रशिक्षण गतिविधियों के नोडल अधिकारी गौरव कुमार ने वर्कशॉप में पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के जरिए एम.सी.एम.सी. यानि मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनिटरिंग कमेटी का उद्ïदेश्य, इसके नियम एवं कार्य तथा पत्रकार के दायित्व पर विस्तार से खुलासा किया।

उन्होंने कहा कि प्रैस काउंसिल ऑफ इण्डिया की परिभाषा के अनुसार प्रिंट और इलैक्ट्रोनिक मीडिया में कोई समाचार या विश्लेषण जिसके लिए नकद या अन्य किसी रूप में भुगतान किया जाता है, वह पेड न्यूज़ है। उन्होंने कहा कि आदर्श आचार संहिता ना केवल राजनीतिक दलो पर बल्कि हर एक व्यक्ति पर लागू होती है, इसलिए इसका पालन जरूरी है।

उन्होंने लेवल प्रेईंग फिल्ड की बात करते हुए कहा कि सभी को चुनाव लड़ऩे का मौका मिले, बराबर के अधिकार हों, कोई छोटा-बड़ा ना हो, ताकि रूलिंग पार्टी फायदा ना उठा सके, इसके लिए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट किया जाता है। उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के अनुसार मतदान वाले क्षेत्र में मतदान से 48 घण्टे पहले सिनेमा से, टेलीविजन या अन्य किसी तरह के उपकरण की सहायता से चुनाव प्रचार करना प्रतिबंधित है।

इसी प्रकार धारा 127 ए के तहत इस अवधि में किसी भी प्रकार का एग्जिट पॉल एवं उसके परिणाम प्रसारित करना प्रतिबंधित है। उन्होंने यह भी बताया कि इस अधिनियम की धारा 10 ए के अनुसार निर्धारित तरीके तथा समयावधि में कोई अभ्यर्थी अपने चुनावी खर्चे को प्रस्तुत करने में असफल होता है, तो उसे अयोग्य किया जा सकता है।

उन्होंने एम.सी.एम.सी. कमेटी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका कार्य विज्ञापनो का प्रमाणीकरण करना। विज्ञापन के सन्दर्भ में वैधानिक प्रावधानो के उल्ंलघनो का प्रशिक्षण करना तथा भुगतान वाले समाचारो का प्रशिक्षण करना है। इस मौके पर चुनाव तहसीलदार सुनील भौरिया भी उपस्थित थे। वर्कशॉप में आए वरिष्ठï पत्रकार शेलेन्द्र जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ऐसी कार्यशालाएं समय-समय पर आयोजित की जानी चाहिएं।

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