भारतीय किसान यूनियन ने पंचायत करके किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया

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भारतीय किसान यूनियन ने मानव सेवा संघ के पार्क में बड़ी पंचायत करके किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया। किसानों ने कहा है कि सरकार वो दिन भूल गई वोट लेने से पहले कहा करती थी कि किसानों की फसलों के लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिए जाएंगे। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दिया जायेगा और इस देश के किसानों के अच्छे दिन आएंगे क्योंकि आज तक की जितनी भी सरकारें आई उन्होंने किसानों को लूटा है। किसानों ने भी यह सोच लिया कि शायद पिछली सरकारों से हमारा पीछा छूटेगा और नई सरकार आकर हमें फसलों के अच्छे दाम देगी और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कर्जे में दबे लोगों को आत्महत्या करने का सिलसिला रूक जाएगा। यह सोचकर मोदी सरकार को सत्ता पर बैठाने का काम किया। लेकिन अब किसानों के इतने बुरे दिन आए कि वो पिछली सरकारों में भी नहीं थे। इसलिए किसानों में इतना भारी रोष पनप रहा था कि उन्होंने कर्ण पार्क से चलकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए रणधीर लाइन, कल्पना चावला हास्पिटल गेट, अस्पताल चौंक से होते हुए 12 सैक्टर लघु सचिवालय पहुंचे। वहां पर किसानों ने एक घंटे तक धरना दिया एवं किसान नेताओं ने भाषण दिया। उन्होंने सरकार विरोधी नीतियों का खुलकर बखान किया उसके बाद एसडीएम करनाल को ज्ञापन सौंपा। उससे पहले किसानों ने कहा कि हम ज्ञापन डीसी साहब को देेंगे लेकिन अधिकारियों ने कहा कि डीसी साहब कहीं बाहर चले गए हैं तो किसानों ने वहीं पर बैठकर धरना शुरु कर दिया। जिसके बाद एसडीएम पहुंचे और किसानों को मनाकर उन्होंने किसानों से ज्ञापन लिया।
आज ही कर्जमुक्त यात्रा करते हुए शमशेर दहिया की अगुवाई में कर्ण पार्क में किसान पंचायत में शामिल हो गई। वहां से प्रदेशाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य की अगुवाई में किसानों का काफिला शहर की सडक़ों से गुजरते हुए मिनी सचिवालय पहुंचा। यह ज्ञापन किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल को करनाल के उपायुक्त के माध्यम से भेजा गया जिसमें किसानों की मुख्य समस्याओं के हल करने की बात कही गई।
किसानों की समस्याएं इस प्रकार थी : 1. किसानों को फसलों के लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिए जाएं ताकि किसानों की स्थिति ठीक हो सके व लागत पर 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए। 2. किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए व आगे बिना ब्याज कर्ज दिया जाये। 3. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को जल्द से जल्द से लागू किया। 4. भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1.1.2014 सैक्शन 14/2 के तहत हरियाणा के किसानों को जमीन का मालिकाना हक रेवेन्यु रिकार्ड में दर्ज किया जाए। 5. हरियाणा के उन सभी किसानों को बीपीएल में शामिल किया जाए जिन किसानों के पास 3 एकड़ से कम जमीन है। 6. किसानों को 60 साल के बाद पैंशन कर्मचारियों की तर्ज पर दी जाए। 7. फसल बीमा योजना  किसान हितैषी नहीं है उसको किसान हितैषी बनाया जाए या खत्म कर दिया जाए।
किसानों ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए नहीं तो भारतीय किसान यूनियन किसानों के साथ मिलकर 9 तारीख से जेल भरो आंदोलन शुरु करेगी।
इसमें मुख्य रूप से प्रदेशाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य, राष्ट्रीय सलाहाकार अजीत सिंह हाबड़ी, पूर्व प्रधान जय कुमार, चौ. कबूल सिंह, अम्बावता गुट के प्रदेश अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया, बलविन्द्र सिंह बाजवा, अजीत सिंह काहलो, गुरमुख सिंह, मास्टर अजीत सिंह, चौ. मलखान सिंह, सैक्रेट्री टेकचन्द, जीवन सिंह असन्ध ब्लाक प्रधान, माईचन्द कारसा, अजीत सिंह जाम्बा, बाबूराम करनाल ब्लाक प्रधान, कैप्टन महीपाल राणा, स. सुक्खा सिंह, मलूक सिंह, छत्तरपाल, मा. रामकुमार आदि सैैंकड़ों किसानों ने भाग लिया।
जारीकर्ता : सेवा सिंह आर्य, प्रदेशाध्यक्ष
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