हरियाणा के करनाल जिले के खेल प्रेमियों और पेशेवर तैराकों के लिए इस गर्मी का सीजन निराशाजनक साबित हो सकता है। शहर के प्रतिष्ठित करण स्टेडियम स्थित स्विमिंग पूल, जिसे करण ताल के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मरम्मत कार्य समय पर पूरा न होने के कारण इस साल यहां तैराकी की गतिविधियां शुरू होने की संभावनाएं बेहद कम नजर आ रही हैं। यह स्थिति न केवल उन सैकड़ों खिलाड़ियों के लिए चिंता का विषय है जो यहां नियमित अभ्यास करते हैं, बल्कि उन आम नागरिकों के लिए भी बड़ा झटका है जो गर्मियों के दौरान यहां तैराकी का आनंद लेने आते हैं।
स्टेडियम परिसर के भीतर स्थित इस स्विमिंग पूल की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय बनी हुई है। चारों ओर फैली गंदगी, उखड़ी हुई टाइलें और कोच रूम की टूटी खिड़कियां खेल विभाग की अनदेखी की कहानी बयां कर रही हैं। पूल के भीतर उतरने वाली सीढ़ियों पर जंग लग चुका है और पानी निकासी की नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं। खिलाड़ियों का सामान रखने के लिए बनाया गया क्षेत्र भी पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का कहना है कि उचित रखरखाव न होने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ने लगा है, जो खेल परिसर की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है।
इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए करनाल के जिला खेल अधिकारी (डीएसओ) राजवीर रंगा ने बताया कि मरम्मत कार्य रुकने का मुख्य कारण तकनीकी और बजट संबंधी अड़चनें हैं। उन्होंने साझा किया कि पूर्व में जो बजट स्वीकृत हुआ था, वह केवल सिविल कार्य यानी ऊपरी मरम्मत के लिए था। हालांकि, जांच के दौरान यह पाया गया कि पूल की भूमिगत पाइपलाइनें लीक हो रही हैं और इसकी मशीनरी को भी बदलने की सख्त जरूरत है। अधिकारियों का तर्क है कि यदि पाइपलाइन ठीक किए बिना ऊपर से टाइलें लगा दी जातीं, तो भविष्य में लीकेज की समस्या के कारण पूरी मरम्मत व्यर्थ हो जाती। इसी दूरदर्शिता के कारण काम को बीच में रोकना पड़ा ताकि पाइपलाइन और मशीनरी के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर बताया गया है कि 31 मार्च को वित्तीय वर्ष की समाप्ति के कारण पुराने बजट सत्र में अतिरिक्त राशि का आवंटन संभव नहीं हो सका। अब खेल विभाग की नजरें आगामी नए वित्तीय वर्ष के बजट पर टिकी हैं। जिला खेल अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, इसलिए जैसे ही मुख्यालय से अतिरिक्त बजट की मंजूरी मिलेगी, उसी ठेकेदार के माध्यम से काम तुरंत शुरू करवा दिया जाएगा। इससे समय की बचत होगी क्योंकि दोबारा टेंडर प्रक्रिया दोहराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
करण स्टेडियम का यह स्विमिंग पूल केवल एक खेल सुविधा नहीं है, बल्कि करनाल की खेल प्रतिभाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर महीने हजारों की संख्या में लोग यहाँ तैराकी के लिए आते थे। अकेले करीब 40 से 50 पेशेवर तैराक ऐसे हैं जो राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए यहीं अभ्यास करते हैं। इस साल अभ्यास की सुविधा न मिलने से उनकी तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है। खेल विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि खिलाड़ियों को होने वाली यह परेशानी गंभीर है, लेकिन वे इसे जल्द से जल्द हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल, जब तक नया बजट आवंटित नहीं होता और मशीनी सुधार कार्य पूरा नहीं होता, तब तक तैराकों को इस तपती गर्मी में किसी विकल्प की तलाश करनी होगी या फिर मरम्मत कार्य शुरू होने का इंतजार करना होगा।