मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की आशंकाओं के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखना और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने से रोकना है।
इस नई घोषणा के बाद एक्साइज ड्यूटी के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीजल पर पहले ली जाने वाली 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी अब पूरी तरह से समाप्त होकर ‘शून्य’ (NIL) के स्तर पर आ गई है। वहीं, पेट्रोल पर लगने वाली 13 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी अब 10 रुपये घटकर मात्र 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है। यद्यपि सरकार के इस कदम से आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल के वर्तमान खुदरा दामों में तत्काल कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है, लेकिन यह कटौती तेल कंपनियों के लिए एक बड़े ‘कुशन’ (Cushion) का काम करेगी ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम दोगुने होने के बावजूद घरेलू कीमतों में वृद्धि न करें।
मिडिल ईस्ट देशों के बीच पिछले 25 दिनों से अधिक समय से छिड़े युद्ध का असर भारत में भी महसूस किया जा रहा है, विशेषकर एलपीजी गैस की आपूर्ति में कुछ स्थानों पर किल्लत देखने को मिली है। इसी पृष्ठभूमि में करनाल सहित देशभर के पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़ जमा होने लगी थी। आम जनता के मन में यह डर बैठ गया था कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी हो सकती है या इनके दाम आसमान छू सकते हैं। इसी घबराहट में लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ रहे थे।
करनाल के सेक्टर-12 स्थित इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप संचालक और विशेषज्ञ सुधांशु कल्याण ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि फिलहाल ईंधन की कोई किल्लत नहीं है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और न ही अफवाहों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई चेन में कोई बाधा नहीं आई है। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (HP, BP, IOCL) को घाटे से बचाना है ताकि वे बढ़ी हुई वैश्विक लागत का भार सीधे ग्राहकों पर न डालें।
वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में यह कटौती नहीं करती, तो निजी और सरकारी तेल कंपनियों के लिए कीमतों को मौजूदा स्तर पर रखना असंभव हो जाता। फिलहाल के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और मुद्रा विनिमय दरों (Currency Exchange Rates) के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी। फिलहाल, करनाल और आसपास के इलाकों में ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से सुचारू है और संकट की कोई स्थिति नहीं है।