- जिले में ट्रांसपयूजन करवाने वाले तीन थैलेसीमिया मरीजों को दवा न होने से तीन की मौत हो चुकी है
करनाल : ब्रेकिंग न्यूज
जिला नागरिक अस्पताल में पिछले डेढ साल से थैलेसीमिया मरीजों को दी जाने वाली डेसिरोक्स-500 टैबलेट उपलब्ध नहीं है। जिले में पिछले साल ब्लड ट्रांसपयूजन करवाने वाले तीन थैलेसीमिया मरीजों को दवा न होने से तीन की मौत हो चुकी है। करीब 80 थैलेसीमिया पीडित बच्चों में आयरन की मात्रा जरुरत से अधिक बढ गई है, जो चिंताजनक है। इस दवा के अभाव में थैलेसीमिया से पीडित बच्चों में हार्ट फेलियर, लीवर डैमेज, एंडोक्राइन व ह़डिडयों की समस्याएं और शारीरिक विकास रुकने का खतरा तेजी से बढ रहा है। दवा न मिलने पर डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवा लेने की सलाह दे रहे है, जिससे परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ गया है।
प्राइवेट मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड रही दवा
करनाल निवासी 13 वर्षीय थैलेसीमिया पीडित बच्चे को हर 15 दिन में ब्लड चढाया जाता है। पिछले एक माह से डेसिरोक्स दवा न मिलने के कारण उसके शरीर में आयरन का स्तर खतरनाक रुप में बढ गया है। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द दवा नहीं मिली तो दिल और लीवर को गंभीर नुकसान हो सकता है। मजबूरी में परिवार प्राइवेट मेडिकल स्टोर से मंहगे दामों पर दवा खरीद रहा है। हालांकि सरकारी अस्पताल द्वारा डेफ्रीप्रोन नामक वैकल्पिक दवा दी जा रही है। लेकिन वह प्रभावी साबित नहीं हो रही है। जिले में 10 से 15 केस ऐस है जिनकेे पेट का तिल्ली बढ चुका है। जिनका करनाल में कोई इलाज नहीं है । ऐसे में उन्हें पीजीआई चंडीगढ रेफर करना पड रहा है। वहां पर भी मरीजों को 20 से 25 दिन की तारीख दी जाती रही है।
थैलेसीमिया क्या है
यह आनुवंशिक होता है, यानी यह जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में जाता है। जीन में ऐसी जानकारी होती है जो कई चीजों को प्रभावित कर सकती है, जिसमें व्यक्ति का रूप-रंग और उसे कुछ विशेष बीमारियाँ होने की संभावना भी शामिल है। थैलेसीमिया के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है।
वर्जन
डेसिरोक्स 500 टैबलेट पिछले एक से डेढ साल से जिला नागरिक अस्पताल के ड्रग स्टोर में नही आई है। इसकी जगह डेफ्रीप्रोन- 500 दी जा रही है। दोनो दवाओं का उद़देश्य सामान है। लेकिन इसके बावजूद मरीजों के शरीर में आयरन का स्तर अधिक पाया जा रहा है। दवा की आपूर्ति के लिए मुख्यालय को डिमांड भेजी जा चुकी है।
डॉ. श्वेता, जिला नोडल अधिकारी, थैलेसीमिया, करनाल ।