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डीएवी पीजी कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान विभाग की ओर से भारतीय संघवाद के बदलते आयाम विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमीनार का सोमवार को शुभारंभ किया गया। सेमीनार का आयोजन पहले दिन दो चरणों में हुआ। पहले चरण में  श्रम एवं रोजगार, खनन विभाग के राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मंत्री नायब सिंह का कॉलेज पहुंचने पर कॉलेज की प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष रमेश वर्मा, सदस्य विजयपाल और कॉलेज प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी सहित स्टाफ सदस्यों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। मंत्री और अन्य अति‌थियों ने मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रजवल्लित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रमेश वर्मा ने सेमीनार के विषय भारतीय संघवाद के बदलते आयाम पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर विषय पर चर्चा निरंतर होती रहनी चाहिए। ताकि इससे राज्यों और केंद्र के बीच संबंध की समीक्षा होती रहे और भारतीय राजनीति को एक सही दिशा मिलने में सहायता मिले। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी शोधार्थियों और विद्वानों को एक निष्कर्ष तक लेकर जाएगी।
 प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी ने कहा कि भारतीय संघवाद के बदलते आयाम आज के समय में ज्वलंत और बहुत पुराना मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस सेमीनार से पता लगेगा कि कैसे सरकारें काम करती हैं और कैसे देश का विकास होता है। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से राजनेताओं और लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। मंत्री नायब स‌िंह सैनी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रोफेसर और स्कॉलरर्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज यहां जो बुद्धिजीवी वर्ग बैठा है वह समाज को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। इसलिए इस सेमीनार के बाद निकले निष्कर्ष का भी राजनेताओं और सरकारों को विशेष फायदा मिलेगा। जोकि देश और प्रदेश के विकास में सहायक होगा।  उन्होंने कहा कि सरकार वचनबद्ध है कि सभी लोगों को मूलभूत सुविधांए मिलें। उन्होँने कहा कि अध्यापक ही समाज को रास्ता दिखाने वाला व्यक्ति है। इनके दिखाए रास्ते का ही समाज अनुसरण करता है। शिक्षक ही समाज में परिवर्तन ला सकता है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा नीति में सुधार करते हुए शिक्षकों के लिए बेहतर कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की योजना है कि 2022 तक देश के हर घर में बिजली पहुंचायी जाए। उन्होंने कहा कि बेराजगारों को रोजगार देने के लिए सरकार भरसक प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ने उद्योगों को विदेशों से आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि लगभग 100 उद्योग चालू होने वाले हैं।
इनसे करीब 1 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कॉलेज को 2 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की। कॉलेज समिति के अध्यक्ष रमेश वर्मा, सदस्य विजयपाल एवं प्राचार्य डॉ. सैनी ने मंत्री को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य डॉ. वाईपी शर्मा, उप प्राचार्य डॉ. एसके सिंधी, डॉ. भीम सिंह, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. संजय जैन सहित अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। ————————-—-
सेमीनार का प्रातःकालीन सत्रसेमीनार के प्रथम चरण में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. आरसी खान ने मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय संघवाद के बदलते आयाम विषय पर विचार रखते हुए कहा कि कहा कि भारत में राजनीतिक विभिन्नताओं के बावजुद भी एकता है। यही राष्ट्र की मजबूती का आधार है। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से आई वक्ता डॉ. जगरूप कौर ने कहा कि देश में केंद्र और राज्य की सरकारों के मध्य सामज्सय स्थापित करने के लिए संघीय सरकारों को लोकतां‌त्रिक व्यव्स्था के अनुरूप कार्य करने चाहिए। शाहबाद से आए डॉ. वीके मल्हौत्रा ने कहा कि सरदार पटेल ने रियासतों का एकीकरण कर मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया था। लेकिन हमने अलग राज्यों का गठन कर संघीय व्यवस्था को तोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सविधान का अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य का गठन किया जाता है। जोकि देश हित में नहीं है। इसलिए इसमें संसोधन की आवश्यकता है। ताकि देश की एकता और अखंडता स्थापित रह सके।
सेमीनार के सांयकालीन स्तर में कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएवी कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बालकृष्ण कौशिक ने की। उन्होंने कहा कि चाहे भारतीय राजनीति में कोई भी कमियां रहीं हो। परंतु इस देश में चुनाव से सत्ता का जो हस्तांतरण होता है वह अपने आप में अदभूत है। उन्होंने स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को शक्तियों का हस्तांतरण करने की वकालत की। रिसोर्स पर्सन पूर्व प्राचार्य डॉ. रामजी लाल ने कहा कि भारत बहु भाषाई, बहु धर्मी, बहु जातीय, बहु संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्नता और भिन्नता वाला देश है। जिसमें संघात्मक व्यवस्था बेहतरीन व्यवस्था है। रिसोर्स पर्सन प्रो. डॉ. अनीता अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संघवाद के ढांचे की रक्षा के लिए भारत में बहु सांस्कृतिकवाद की रक्षा एक आवश्यक तत्व है। इसलिए विभिन्नताओं में एकता वाले इस देश के स्वरूप को बचाना ही हमारा उदेश्य है। सेमीनार के सांयकालीन सत्र के ‌तीसरे चरण की अध्यक्षता करते हुए प्रो. दिल्लेराम ने कहा कि संघीय व्यवस्था को देश की एकता और अखंडता को कायम रखने के लिए अपनाया गया था। परंतु सत्ताधारियों ने सत्ता में बने रहने के लिए समाज को बांटने का काम किया। इसके अतिरिक्त कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के विकास सब्रवाल ने भी विषय पर अपने विचार रखे। दूरवर्ती क्षेत्रों और अन्य राज्य से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र जमा कराकर संगोष्ठी में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. रामपाल सैनी ने सभी का आभार प्रकट करते हुए उन्हे स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।  कार्यक्रम के संयोजक राजनीतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बलराम शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राफेसर, प्राध्यापक एवं प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्वान उपस्थित रहे।

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