October 27, 2026
27 oct 10
  • मिलर्स बोले- FCI नहीं उठा रही स्टॉक

करनाल ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में धान की खरीद और चावल की डिलीवरी को लेकर राइस मिलर्स और सरकारी एजेंसियों के बीच विवाद बढ़ गया है। मिलर्स का आरोप है कि पिछले सीजन का चावल मिलों में पड़ा है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम (FCI) और संबंधित एजेंसियां इसे उठाने को तैयार नहीं हैं। इसके चलते प्रदेश के 433 राइस मिल डिफॉल्टर हो गए, जबकि करनाल जिले के 100 से ज्यादा मिलों को इस सीजन में धान अलॉट नहीं किया गया। मिलर्स ने अधिकारियों पर दबाव बनाने और जबरन वसूली के आरोप लगाए हैं।

उनका कहना है कि इस संबंध में सरकार और चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी गई है। जिला राइस मिल चेयरमैन नरेश बंसल, उपप्रधान राजिंदर मोंगा, सौरव गुप्ता सहित सभी राइस मिलर्स ने प्रेसवार्ता कर कहा कि पिछले सीजन में चावल की डिलीवरी में हुई देरी के लिए मिलर्स को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार इसकी मुख्य वजह एजेंसियों की ओर से चावल नहीं उठाना और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) समय पर उपलब्ध नहीं कराना है।

मिलर्स का कहना है कि धान अलॉट नहीं होने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और मिलों में काम करने वाले मजदूरों व कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है।

54 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य से ज्यादा खरीद

मिलर्स के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के सीजन में केंद्र सरकार ने 54 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया था, लेकिन हरियाणा में इससे अधिक धान की सरकारी खरीद हुई। उनका दावा है कि FCI ने निर्धारित मात्रा के चावल की डिलीवरी लेने के बाद जगह की कमी के कारण आगे चावल लेना बंद कर दिया था।

मिलर्स के अनुसार, बाद में प्रदेश सरकार के प्रयासों से 4 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी लेने की अनुमति मिली। इसके बावजूद करीब 2.55 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी मिलों में पड़ा है। मिलर्स का कहना है कि वे लंबे समय से इस चावल का रखरखाव कर रहे हैं। ऐसे में चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ रहा है।

फोर्टिफाइड राइस कर्नेल में देरी से फरवरी में शुरू हुई डिलीवरी

मिलर्स ने बताया कि करनाल जिले में FRK समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया। उनके अनुसार, इसी वजह से चावल की डिलीवरी नवंबर के बजाय फरवरी में शुरू हो पाई। उनका कहना है कि जब डिलीवरी की प्रक्रिया ही देर से शुरू हुई तो तय समय पर चावल जमा नहीं होने की पूरी जिम्मेदारी मिलर्स पर डालना उचित नहीं है।

मिलर्स का आरोप है कि एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। पिछले सीजन की डिलीवरी पूरी नहीं होने के कारण इस सीजन में धान का अलॉटमेंट नहीं मिला, जिससे मिलों का काम प्रभावित हो रहा है।

80 प्रतिशत डिलीवरी वालों को भी मिला धान

मिलर्स के अनुसार, सरकार ने पहले उन राइस मिलों को धान अलॉट किया, जिन्होंने पिछले सीजन में 100 प्रतिशत चावल की डिलीवरी पूरी कर दी थी। इसके बाद 80 प्रतिशत डिलीवरी पूरी करने वाले मिलर्स को भी धान अलॉट करने की व्यवस्था की गई। इससे कई मिलों को काम मिला और मंडियों में धान की खरीद व्यवस्था को सुचारू रखने में मदद मिली।

मिलर्स का कहना है कि करनाल में अभी भी 100 से ज्यादा मिल ऐसे हैं, जिन्हें इस सीजन में धान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि एक राइस मिल से कई परिवारों की आजीविका चलती है। धान अलॉट नहीं होने से मजदूरों, कर्मचारियों और अन्य कामगारों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

सरकार से चावल उठाने का समाधान निकालने की मांग

मिलर्स ने बताया कि चंडीगढ़ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में चावल की डिलीवरी की समस्या पर चर्चा हुई थी। बैठक में FCI और संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने समाधान के सुझाव रखे गए। मिलर्स ने मांग की कि मिलों में पड़े चावल को जल्द उठाया जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लंबे समय से रखे स्टॉक का समाधान हो सके।

मिलर्स ने सरकार से डिफॉल्टर घोषित किए गए मिलों के मामलों की समीक्षा करने और उन्हें इस सीजन में धान अलॉट करने पर विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि जब चावल की डिलीवरी में देरी एजेंसियों की ओर से हुई है, तो उसका नुकसान अकेले मिलर्स को नहीं उठाना चाहिए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *